इसके अलावा जिलाधिकारी को यह अधिकार होगा कि वह स्वयं मनोवैज्ञानिक पैनल का गठन करें या इस तरह के बच्चों की देखभाल में सक्षम संस्थानों को जोड़े। जिलाधिकारी को यह भी फैसला लेने का अधिकार दिया गया है कि वह संस्थान के प्रबंधन और कर्मचारियों को पूरी तरह से या बच्चों की सुविधा के अनुसार बदले।
एडवाइजरी के अनुसार जरूरत के मुताबिक बच्चों का स्थान परिवर्तन भी किया जा सकता है। लेकिन जिला प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि इस तरह के बच्चों की पहचान उजागर न हो। मंत्रालय ने कहा कि बाल आश्रय गृहों में दुर्व्यवहार के मामले में घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जिला प्रशासन को कार्य योजना तैयार करने में मदद करने का अधिकार होगा।