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क्या है डीडीसी चुनाव, जम्मू-कश्मीर की राजनीति पर क्या होगा इसका प्रभाव, पढ़ें

Tue, 22 Dec 2020 02:03 PM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
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जम्मू-कश्मीर में इस साल पहली बार जिला विकास परिषद (डीडीसी) के चुनाव हुए। पांच अगस्त, 2019 को अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद राज्य में हुई यह पहली बड़ी राजनीतिक गतिविधि रही। आठ चरण में हुए चुनाव में 280 सीटों पर 51.42 फीसदी मतदान हुआ। दूसरी तरफ, आज वोटों की गिनती की जा रही है, शाम तक 2178 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला होने वाला है। आइए ऐसे में जाने डीडीसी चुनाव का पूरा इतिहास और जम्मू-कश्मीर की राजनीति पर इसका क्या होगा प्रभाव... 

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सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, केंद्र ने 73वें संशोधन को जम्मू-कश्मीर में पूरी तरह लागू कर दिया। यह पिछले 28 सालों से लंबित पड़ा हुआ था। इस तरह राज्य में तीन स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था लागू हो गई, जो राज्य के इतिहास में पहली बार हुआ। मोदी सरकार इसे जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक प्रमुख और अंतिम कानूनी आवश्यकता के रूप में मान रही थी। 

जम्मू-कश्मीर में जिला विकास परिषद क्या है?

अक्तूबर, 2020 को जम्मू-कश्मीर ने 'जम्मू-कश्मीर पंचायती राज कानून, 1989' को अपनाया। अब जम्मू-कश्मीर में हर जिले में एक जिला विकास परिषद (डीडीसी) होगा, जिसका नगरपालिका क्षेत्रों को छोड़कर पूरे जिले पर अधिकार क्षेत्र होगा। हर डीडीसी में 14 सीधे निर्वाचित सदस्य होंगे। इस तरह, जम्मू-कश्मीर के 20 जिलों में 280 सीधे निर्वाचित सदस्य होंगे। हर डीडीसी में सीधे निर्वाचित सदस्य, सभी खंड विकास परिषदों के अध्यक्ष और जिले से विधान सभा के सदस्य (विधायक) शामिल होंगे। डीडीसी राज्य में पहले से रहे जिला विकास बोर्ड (डीडीबी) की जगह लेगा। डीडीबी में एक कैबिनेट मंत्री इसकी अध्यक्षता करता था और इसमें विधायक, विधान परिषद सदस्य और सांसद शामिल होते थे। डीडीबी में, विकास कार्यों की योजना और निष्पादन ज्यादातर जिला विकास आयुक्तों द्वारा किया जाता था। डीडीसी का कार्यकाल पांच वर्षों का होगा और चुनावी प्रक्रिया के तहत इसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाओं को आरक्षण दिया जाएगा। जिले के अतिरिक्त जिला विकास आयुक्त (या अतिरिक्त डीसी) जिला विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी होंगे। डीडीसी को एक साल में कम से कम चार आम बैठकों का आयोजन करना होगा, जिसमें हर तिमाही में एक बैठक किया जाना शामिल होगा। डीडीसी के लिए निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए 14 निर्वाचन क्षेत्रों को सीमांकित किया गया है। इन निर्वाचन क्षेत्रों को जिले के ग्रामीण क्षेत्रों से लिया गया है और निर्वाचित सदस्य बाद में खुद के बीच से डीडीसी के एक अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव करेंगे।

क्या होगा डीडीसी का रोल? 

जम्मू-कश्मीर के 73वें संवैधानिक संशोधन को अपनाने के साथ इसने पंचायती राज संस्थानों के सभी तीन स्तरों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया। इसमें पंचायत, खंड विकास परिषद और डीडीसी शामिल हैं। डीडीसी अपने अधिकार के तहत क्षेत्र के विकास कार्यक्रमों के तैयार के लिए जिम्मेदार होगा। वित्त, विकास, सार्वजनिक कार्यों, स्वास्थ्य एवं शिक्षा और कल्याण के लिए पांच समितियों को गठित किया जाएगा। 
 

इस नई संरचना के पीछे केंद्र का उद्देश्य क्या है?

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने एक बयान में कहा कि पंचायती राज्य संस्था के तृतीय श्रेणी का राज्य में लागू होना यहां पूरे 73वें संशोधन अधिनियम के कार्यान्वयन का प्रतीक है। सरकार का यह मानना है कि पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा पंचायती राज प्रणाली को दोषपूर्ण माना जाता था। लेकिन सरकार अब इसे राज्य में उपराज्यपाल प्रशासन के माध्यम से पुनर्जीवित कर रही है। वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों का तर्क है कि केंद्रशासित प्रदेश में निर्वाचित प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति में, डीडीसी प्रभावी रूप से यहां के 20 जिलों में जमीनी स्तर पर विकास के लिए प्रतिनिधि निकाय बन जाएगा। उन्हें उम्मीद है कि इसके जरिए कुछ पूर्व विधायक भी सत्ता में आना चाहेंगे।  
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तैयार होगी नेताओं की एक नई खेप

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बात की संभावना है कि प्रत्येक जिले से 14 निर्वाचित सदस्य अंततः विधानसभा चुनाव में भाग लेंगे। ऐसे में यह इन लोगों की एक नई टीम को जन्म दे सकता है जो अंततः विधायक के रूप में विधानसभा में प्रवेश करेंगे। सुरक्षा ग्रिड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में डीडीसी चुनाव करना एक बड़ा बदलाव ला सकता है, क्योंकि यह नेताओं की एक नई खेप को तैयार करेगा। डीडीसी चुनाव और विधानसभा चुनावों के बीच की समय अवधि निर्वाचित डीडीसी सदस्यों के लिए लोगों के साथ तालमेल बिठाने और लोकप्रियता हासिल करने की पर्याप्त संभावना देगी। इससे उन्हें विधानसभा चुनाव जीतने में मदद मिल सकती है। 
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