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Kerala: असहमति लोकतंत्र में जरूरी पर इसे हिंसा में नहीं बदला जाना चाहिए, गवर्नर खान बोले- शिक्षा से आएगा बदलाव

Fri, 26 Jan 2024 11:11 AM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Kerala: राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा समाज में बदलाव लाने का मुख्य साधन है और पुराने पूर्वाग्रहों से दिमाग को शुद्ध करने का यही एकमात्र प्रभावी तरीका है। भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि हम अपने विचारों और कार्यों में क्या हैं।
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केरल के राज्यपाल - फोटो : Social Media
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विस्तार
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केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने 75वें गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर शुक्रवार को कहा कि असहमति और मतभेद लोकतांत्रिक कामकाज के आवश्यक तत्व हैं, लेकिन उन्हें हिंसा में तब्दील नहीं किया जाना चाहिए।

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खान ने तिरुवनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में गणतंत्र दिवस समारोह का नेतृत्व करते हुए कहा कि समाज को शासन को प्रभावित करने के लिए समूह प्रतिद्वंद्विता या सत्ता के लिए आंतरिक संघर्ष की अनुमति नहीं देनी चाहिए क्योंकि यह भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक बुरा उदाहरण पेश करेगा।

राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा समाज में बदलाव लाने का मुख्य साधन है और पुराने पूर्वाग्रहों से दिमाग को शुद्ध करने का यही एकमात्र प्रभावी तरीका है। भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि हम अपने विचारों और कार्यों में क्या हैं। इसके लिए हमें उच्च शिक्षण संस्थानों की आवश्यकता है जो वास्तव में स्वायत्त हों और किसी भी बाहरी हस्तक्षेप से मुक्त हों जो युवाओं को शैक्षणिक वातावरण को प्रदूषित करने वाली गतिविधियों में संलग्न करने के लिए प्रेरित करता हो।
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खान ने स्टार्टअप, स्वास्थ्य और पर्यटन समेत विभिन्न क्षेत्रों में केरल की ओर से हासिल की गई उपलब्धियों का जिक्र किया और कहा कि ऐसे संपन्न राज्य के लोगों के लिए यह जरूरी है कि वे स्वस्थ लोकतंत्र का पोषण करें जो परस्पर सम्मान और गहरी समझ की भावना के साथ रचनात्मक सार्वजनिक संवाद को प्रोत्साहित करे। 

उन्होंने कहा, "असहमति और मतभिन्नता लोकतांत्रिक कामकाज के आवश्यक तत्व हैं. लेकिन असहमति का हिंसा में तब्दील होना, चाहे वह शारीरिक हो या मौखिक, लोकतंत्र के साथ विश्वासघात है और यह मानवीय विफलता का प्रतीक है।" उन्होंने कहा कि समय की मांग है कि समाज में अधिक सभ्यता, सहानुभूति और संवाद की संस्कृति को बढ़ावा दिया जाए, जो "तर्क की शक्ति में विश्वास करता है न कि शक्ति के तर्क में।" राष्ट्रीय ध्वज फहराने और परेड का निरीक्षण करने के बाद, राज्यपाल ने विभिन्न पुलिस और सशस्त्र बलों की टुकड़ियों से सलामी ली, जिन्होंने जोरदार मार्च पास्ट किया।

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