राज्यसभा के सभापति धनखड़ ने कहा, हम में से कुछ लोग घातक इरादे के साथ हमारे संस्थानों को कलंकित करने और नीचा दिखाने का भयावह प्रयास करते हैं। उन्होंने लोगों से ऐसी ताकतों के बारे में आलोचनात्मक होने का आग्रह किया और कहा कि नागरिकों को 'भारत विरोधी विमर्श' को बेअसर करने में कभी नहीं हिचकना चाहिए।
यहां संस्कृति मंत्रालय के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, 'आपको उन भयावह ताकतों को हराने के लिए अपने 'मन की बात' कहनी होगी जो इसके विपरीत सोचते हैं। उपराष्ट्रपति ने संसद को 'लोकतंत्र का मंदिर' बताते हुए कहा कि जहां बहस, चर्चा और संवाद होना होता है, कोई भी सदन में व्यवधान और व्यवधान की उम्मीद नहीं करता है।
यह जिक्र करते हुए कि संसद में बहुत प्रतिभाशाली लोग हैं, धनखड़ ने कहा कि वे बड़े पैमाने पर अनुभव लाते हैं और राज्यसभा के सभापति के रूप में वह चाहते हैं कि प्रतिभा का इस्तेमाल राष्ट्रीय उद्देश्य के लिए किया जाए। उन्होंने कहा, लेकिन अगर हमारे लोकतंत्र के मंदिर संवाद और चर्चा में शामिल नहीं होते हैं और वे व्यवधान और अशांति से ग्रस्त होते हैं, तो जगह खाली नहीं होने वाली है। इस पर उन ताकतों का कब्जा हो जाएगा जो संविधान के प्रति जवाबदेह नहीं हैं।'
उन्होंने लोगों से देश के नागरिक के रूप में अपनी शक्ति का इस्तेमाल करने का आग्रह किया ताकि राष्ट्र को पहले और हर चीज से ऊपर रखने के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र उत्पन्न हो।