लतिका कपूर (34) कहती हैं कि कोई भी पूर्ण नहीं होता। किसी की कमी दिख जाती है, किसी की नहीं दिखती। बस, कमियों के सामने झुकने की बजाय अपनी राह तलाशने और अपनी मंजिल पर पहुंचने की जिद होनी चाहिए। लतिका ने अमर उजाला को बताया कि जब उन्होंने पढ़ाई शुरू की तब स्कूल उन्हें एडमिशन देने को तैयार नहीं थे। साथ पढ़ने वाले बच्चे दोस्ती करने को तैयार नहीं थे। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
एमआर विवेकानंद मॉडल स्कूल से शुरूआती पढ़ाई के बाद गुरुनानकदेव विश्वविद्यालय से बीबीए किया। इसके बाद कॉल सेंटर से जॉब शुरू किया। जल्दी ही उन्हें रॉयल बैंक ऑफ़ स्कॉटलैंड में काम करने का मौका मिला। आज वे नेस्ले इंडिया की एचआर हैं और अपनी कम्पनी के लिए लोगों के टैलेंट को परखती हैं और उन्हें नौकरी देती हैं।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
अशक्त लोगों के लिए काम करने वाले संगठन 'वी द पीपल इंडिया' के चेयरमैन कबीर सिद्दीकी ने कहा कि सेरेब्रल पालसी में मस्तिष्क से हाथ-पैर या किसी अन्य अंगों को सन्देश मिलना बंद हो जाता है। मांसपेशियों में अकड़न या कमजोरी आ जाती है जिससे लोग कोई काम नहीं कर सकते। लेकिन लतिका जैसे युवाओं ने यह साबित कर दिखाया है कि अगर मजबूत इरादे हों तो दिव्यांगता को पीछे छोड़ा जा सकता है।