केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह के खेद प्रकट करने के बाद उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा वापस ले लिया है। अदालत ने दोनों पक्षों की सहमति के बाद मुकदमे की सुनवाई बंद कर दी।
पटियाला हाउस अदालत के एसीएमएम समर विशाल के समक्ष गडकरी और दिग्विजय की ओर से पेश संयुक्त अर्जी में मुकदमा वापस लेने का आग्रह किया गया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। अर्जी में कहा गया कि कुछ समय पहले दोनों नेताओं में बातचीत हुई थी।
इस दौरान दोनों के बीच मुकदमा वापस लेने को सहमति बन गई थी। दोनों नेताओं ने माना कि जो बयान दिया गया वह सियासी प्रचार की गरमागरमी में दिया गया था जो हमेशा सही नहीं होता। इसलिए जनहित के मद्देनजर इस मुकदमे को खत्म करने के लिए तैयार हो गए हैं।
अदालत ने इस मामले में दिग्विजय सिंह को दिसंबर 2012 में जमानत दी थी। दिग्विजय सिंह ने गडकरी पर भाजपा के सांसद अजय संचेती से कारोबारी रिश्ते होने का आरोप लगाया था। इस आरोप का खंडन करते हुए गडकरी ने मानहानि की शिकायत दायर की थी। कोर्ट में गडकरी ने कहा था कि उनके संचेती से कोई कारोबारी रिश्ते नहीं है।
यह बयान पूरी तरह झूठा है और केवल इसलिए दिया गया था जिससे ऐसा लगे कि मैंने कोयला खदान आवंटन में संचेती को फायदा पहुंचाया था। यह बयान उनकी छवि को खराब करने और उन्हें बदनाम करने के लिए दिया गया था। गडकरी की इन दलीलों का दिग्विजय सिंह ने खंडन किया था।