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Digital Arrest: फूले हाथ-पांव, जब आईजीआई कस्टम से आया फोन...पूछा- इंडोनेशिया पार्सल में क्या भेजा था?

सार

Digital Arrest: कोविड के बाद से अदालतें ऑन लाइन चली तो साइबर अपराधियों ने भी फर्जी ऑन लाइन कोर्ट बना ली है। वह ऑन लाइन कोर्ट की कार्यवाही दिखाकर लोगों को गिरफ्तारी का डर दिखाते हैं और पैसे की उगाही कर लेते हैं। इसके अलावा दूसरे देशों में पार्सल, पार्सल में ड्रग्स का ट्रेंड चल रहा है।
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Cyber Crime - फोटो : FREEPIK
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विस्तार
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विश्वविद्यालय के प्रो. बी.के. शर्मा घर जा रहे थे और रास्ते में फोन आया। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के कस्टम विभाग से फोन आने की सूचना के साथ कस्टमर केयर की तरह एग्जीक्यूटिव से बात करने के लिए 2 दबाने की सूचना मिली। थोड़ी देर बाद फोन पुलिसिया अंदाज में इंडोनेशिया भेजे गए पार्सल की जानकारी ली जाने लगी। इस पर प्रो. शर्मा घबरा गए, गाडी सड़क के किनारे लगाई और घबराहट में जवाब देने लगे। इसके बाद प्रो. शर्मा ने कोई भी पार्सल न भेजने की बात कही तो तत्काल आईजीआई आने के लिए कहा गया।
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प्रो. शर्मा बात कर रहे थे कि अचानक उन्हें इल्म हुआ कि वो डिजिटल क्राइम के शिकार हो रहे हैं, क्योंकि सरकार का विभाग इस तरह से फोन नहीं करता। फिर क्या था, उन्होंने साहस बटोर कर कड़क अंदाज में फोन करने वाले को हड़काना शुरू कर दिया। इस तरीके से प्रो. शर्मा एक बड़ी धोखाधड़ी से बच गए। लेकिन राजेश चौधरी को डिजिटल अपराधियों ने 30 हजारी कोर्ट ने निकले अरेस्ट वारंट की जानकारी देकर 1.75 लाख रुपये निकाल लिए। राजेश चौधरी ने पुलिस के पास इसकी शिकायत भी कर दी है, लेकिन पूरा मामला ढाक के तीन पात जैसा चल रहा है।
  • एआई की मदद से कस्टमर केयर की तरह फंसाते हैं गैंग
  • हर साल 15 लाख से अधिक हो रहे हैं साइबर अपराध के दर्ज मामले
  • डिजिटल अरेस्ट के चक्रव्यूह में अच्छे-अच्छे हो रहे हैं लूट का शिकार

हर साल दर्ज हो रहे हैं 15 लाख से अधिक मामले
देश में साइबर ठगों के हौसले काफी बुलंद हैं। पंजाब में ओसवाल के पद्म विभूषण से सम्मानित ओसवाल के प्रबंध निदेशक का प्रकरण तो काफी चर्चित मामला है। जिसमें सुप्रीम कोर्ट की फर्जी सुनवाई के सहारे अपराधियों ने उन्हें गिरफ्तारी का डर दिखाया और 7.40 करोड़ रुपये उगाह लिए। पिछले साल कवि नरेश सक्सेना को भी डिजिटल अरेस्ट करके अपराधियों ने घंटों उनकी कविताएं सुनी। आगरा की एक महिला को साइबर अपराधियों की ठगी के आगे जान गंवानी पड़ी। इसमें साइबर ठगों ने फोन करके महिला की बेटी के होटल में किसी के साथ पकड़े जाने की सूचना देकर गिरफ्तारी, बदनामी का डर पैदा कर दिया था। इसके बाद सदमें में महिला हार्ट अटैक का शिकार हो गई। गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी माना कि डिजिटल अरेस्ट, फाइनेंशियल फ्रॉड, डेटा सुरक्षा बड़ी चुनौती बनती जा रही है। 2022 में इस तरह के 9.66 लाख मामले दर्ज हुए थे। जबकि 2023 में यह संख्या बढक़र 15.60 लाख के करीब हो गई थी। 2024 में अप्रैल तक साइबर ठगी के इस तरह के मामले 7.5 लाख की संख्या को पार कर गए थे। एनआईसी के एक वरिष्ठ सदस्य की माने तो इस साल के अंत तक इस तरह के करीब 17 लाख मामले दर्ज हो सकते हैं।
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दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी के मुताबिक साइबर ठग आए दिन नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं। कानून मंत्रालय से एडिशनल सेक्रेटरी के पद से रिटायर हुई मुकुलिता विजयावर्गीज के मुताबिक साइबर अपराधी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा लेकर लोगों को भ्रमित कर देते हैं। मुकुलिता बताती हैं कि हर साल सरकार के पास इस तरह की शिकायतों की संख्या बढ़ रही है। इनकी शिकायतों पर पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां ऐसे फोन नंबर के सिम या फिर आईएमआई नंबर वाले फोन को ब्लॉक करने की सिफारिश कर देती हैं। तमाम नंबर ब्लॉक होते हैं, लेकिन इतने भर से इस तरह के अपराध रुकने वाले नहीं हैं। मुकुलिता विजयावर्गीज का कहना है कि इसके लिए सरकार को राजनीतिक प्रतिबद्धता के साथ कुछ ठोस उपाय करने जरूरी हैं।  

सबसे बड़ी चिंता डेटा सुरक्षा की
वित्त मंत्रालय के बैंकिंग डिवीजन के एक अधिकारी कहते हैं कि, एआई (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस) आ रहा है। इसने डेटा सुरक्षा की चिंता को काफी बढ़ा दिया है। सूत्र का कहना है कि आप एक नई गाड़ी खरीद लीजिए। गाड़ी के डिलीवरी में समय लग सकता है, लेकिन इससे पहले आपके पास टूरिज्म समेत तमाम कंपनियों से जुड़े लोगों के फोन आने लगेंगे। सूत्र का कहना है कि कोई दूर बैठा आपके पेमेंट सिस्टम पर नजर रख रहा है। इसलिए उपभोक्ता की गोपनीयता सबसे बड़ी चिंता का विषय है। इस डेटा लीक के जरिए जहां तमाम कंपनियां अपना कारोबार करती हैं, वहीं साइबर ठगी के ठग मोटी मछली तलाश करके उसे ठगने का जाल बिछाते हैं।

पुलिस को मोबाइल के फंक्शन का पता नहीं तो साइबर ठगी से निपटना दूर की बात
वीरेन्द्र कुमार पुलिस स्टेशन में थानाध्यक्ष बनने की कतार में हैं। साइबर ठगी की चर्चा करने पर कहते हैं कि तकनीक रोज नए तरीके से पांव पसार रही है, लेकिन उस हिसाब से सुरक्षा एजेंसियों में प्रशिक्षण और व्यवस्था हो पाना मुश्किल है। दूसरे मोबाइल फोन, इंटरनेट के सर्वर विदेशों में हैं। अब तमाम अपराध मोबाइल एप के जरिए भी हो रहे हैं। जबकि साइबर ठगी आदि की जांच करने वाले पुलिस के अधिकांश अधिकारियों को अपने ही मोबाइल फंक्शन का ठीक से पता नहीं होता। वीरेन्द्र कुमार कहते हैं कि कई बार ऐसा होता है कि अपराध आज हुआ और पुलिस को उसकी सूचना देर से मिलती है। तबतक साइबर अपराधी उस डिवाइस को बंद या नष्ट कर देते हैं। ऐसे में उन्हें ढूंढना अंधेरे में तीर मारने जैसा है।

तेजी से बदल रहा है साइबर अपराध का पैटर्न
पवन कुमार थेल्स में साइबर सुरक्षा अधिकारी हैं। पवन कुमार कहते हैं कि बड़े मामलों में हैकिंग का खतरा रहता है, लेकिन छोटे मामले में अपराध का पैटर्न बदल रहा है। कोविड के बाद से अदालतें ऑन लाइन चली तो साइबर अपराधियों ने भी फर्जी ऑन लाइन कोर्ट बना ली है। वह ऑन लाइन कोर्ट की कार्यवाही दिखाकर लोगों को गिरफ्तारी का डर दिखाते हैं और पैसे की उगाही कर लेते हैं। इसके अलावा दूसरे देशों में पार्सल, पार्सल में ड्रग्स का ट्रेंड चल रहा है। इस समय ईडी जांच एजेंसियों में डर का नया पर्याय बनी है। इसे ध्यान में रखकर साइबर अपराधी लोगों को डराने, उगाहने में अव्वल प्रयोग कर रहे हैं। अब सेक्सटार्शन के लिए की जाने वाली कॉल थोड़ा कम हो रही है। बिजली, पानी के बिल, मोबाइल फोन के कनेक्शन, एटीएम ब्लॉक होने जैसी सूचना वाली फोन कॉल थोड़ा कम हो रही है, लेकिन इसका स्थान दूसरे तरीकों ने ले लिया है।

सरकार चाहे तो अपराध पर लगेगी लगाम
सुप्रीम कोर्ट के वकील और साइबर अपराध पर सक्रिय रहने वाले पवन दुग्गल कहते हैं कि सब राजनीतिक प्रतिबद्धता का मामला है। सरकार चाहे तो साइबर अपराध पर तेजी से लगाम लग सकती है। दुग्गल कहते हैं कि चाहे इंटरनेट हो या मोबाइल फोन से आने वाली कॉल या साइबर अपराध के मोबाइल एप। दुग्गल के मुताबिक सभी किसी न किसी नेटवर्क से आपरेट होते हैं। सरकार को इस नेटवर्क पर कड़ी नजर रखनी चाहिए और एक सख्त तथा प्रभावी कानून बनाना चाहिए।
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