निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में बृहस्पतिवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जिसके बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि अन्य देशों में इसकी क्या स्थिति है...
अमेरिका व अन्य देशों में निजता को मौलिक अधिकार माना गया है। निजता का अधिकार मौलिक अधिकारों में से एक है। विश्व के सबसे पुराने लोकतंत्र में यह एक गंभीर मसला माना जाता है।
अमेरिका
अमेरिका में निजता को लेकर कोई मजबूत कानून नहीं है। वहां पर प्रत्येक राज्य को ये अधिकार दिया गया है कि वह अपनी जरूरतों के हिसाब से कानून बना लें। अमेरिका में निजता से जुड़े हुए जो कानून हैं वह हर क्षेत्र के हिसाब से अलग-अलग हैं।
यूरोपियन यूनियन
वर्ष 1998 में निजता को लेकर यूरोपियन यूनियन में कानून बनाया गया था। इस कानून के तहत कानूनी इस्तेमाल के लिए किसी से भी कोई भी डाटा लिया जा सकता है। हालांकि यह डाटा किस लिए लिया जा रहा है उसका पूर्ण रूप से स्पष्टीकरण देना अनिवार्य है। पूरी पुष्टि होने के बाद ही डाटा उपलब्ध कराया जाता है।
राइट टू बी फॉरगॉटन के तहत किसी व्यक्ति की केवल उतनी ही जानकारी ली जा सकती है जितनी उपलब्ध हो यदि कोई व्यक्ति उसकी सारी जानकारी लेना चाहता है तो वह अपनी कई प्रकार की गुप्त जानकारियां ब्लॉक करवा सकता है।
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फ्रांस
फ्रांस में 1978 में यह अधिनियम (निजता का अधिकार) लाया गया था। इसके बाद इसमें वर्ष 2008 में संशोधन किया गया। डाटा प्रोटेक्शन एक्ट के तहत यहां पर निजता का अधिकार काफी अहम माना जाता है। इसके तहत किसी व्यक्ति की निजी जानकारी को एकत्रित कराने का मकसद उस व्यक्ति की पहचान कराना है।
जर्मनी
जर्मनी में निजता के अधिकार को लेकर प्रावधान एकदम अलग है। यहां प्राइवेसी के तौर पर किसी व्यक्ति का डाटा कलेक्शन करने पर पूरी तरह से पाबंदी है। यदि फिर भी किसी को बहुत जरूरी जानकारी चाहिए तो वह कानूनी अधिकार लेकर जानकारी हासिल कर सकता है।
जापान
निजता को लेकर जापान बहुत ज्यादा सजग है। यहां किसी भी व्यक्ति की निजी जानकारी की सुरक्षा के लिए व्यक्तिगत संरक्षण नियम लागू किया गया है। जापान में केवल वही जानकारी ली जा सकती है जो सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध कराई जा सकती है।