अमरनाथ यात्रा पर हमले को लेकर कश्मीर में सक्रिय आतंकी गुटों के बीच मतभेद है। घाटी में सबसे अधिक संख्या में मौजूद हिजबुल मुजाहिद्दीन (एचएम) यात्रा को छेड़ने केपक्ष में नहीं है। जबकि पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-ताइबा हमले पर आमादा हैं। खुफिया एजेंसियों को मिले इस इनपुट से सरकार और सुरक्षा एजेंसियों में खलबली है।
खासतौर पर जैश की ओर से हमले की ऐसी गंभीर आशंका के बाद सेना ने चुनिंदा संवेदनशील जगहों पर पांच अतिरिक्त बटालियन यानी 5000 सैन्य कर्मियों की तैनाती शुरू कर दी है। इस फैसले से पहले बीते मंगलवार को पूरी यात्रा को 30,000 सुरक्षाकर्मियों के हवाले करने का फैसला लिया है। 29 जून से सात अगस्त तक चलने वाली इस यात्रा के लिए सीआरपीएफ और बीएसएफ की 129 कंपनियां यानि 12900 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती हो चुकी है।
जम्मू-कश्मीर के गवर्नर एन एन वोहरा लगातार हालात का जायजा ले रहे हैं। सेना प्रमुख जनरल विपिन रावत ने बृहस्पतिवार को दिल्ली में यात्रा की सुरक्षा का जायजा लिया। गवर्नर वोहरा और जनरल रावत लगातार संपर्क में हैं। गौरतलब है कि इस बार अमरनाथ यात्रा के लिए दो लाख से भी ज्यादा श्रद्धालुओं ने पंजीकरण करवाया है।