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केंद्र शासित और पूर्ण राज्य में अंतर, जानिए दिल्ली क्यों है और राज्यों से अलग

Wed, 04 Jul 2018 11:56 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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anil baijal arvind kejriwal
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दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिले इसके लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल लगातार केंद्र सरकार से मांग कर रहे हैं। हालांकि यह इतना आसान नहीं है। बता दें कि केंद्र शासित राज्यों में सीएम से ज्यादा शक्तियां एलजी यानी उप राज्यपाल को दी गई हैं।
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इसी को लेकर दिल्ली में मुख्यमंत्री और एलजी में टकराव की स्थिति बनी रहती है। लेकिन इस सबसे पहले हमें केंद्र शासित प्रदेश और पूर्ण राज्य में अंतर समझना जरूरी है। मालूम हो कि भारत में 29 राज्य हैं। जिनमें से 7 केंद्र शासित प्रदेश है। दिल्ली, अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव, लक्षद्वीप तथा पुडुचेरी यह सभी राज्य केंद्र शासित प्रदेशों के तहत आते हैं। 
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अंडमान-निकोबार, दिल्ली और पुडुचेरी का मुखिया उपराज्यपाल होता है।

kejriwal lg
केंद्र शासित प्रदेश में केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए कानून के तहत काम होता है। हालांकि भले ही यहां मुख्यमंत्री को जनता चुनकर भेजती हो। संविधान के अनुसार यहां के कार्यों को करने का अधिकार सीधे राष्ट्रपति को होता है। अंडमान-निकोबार, दिल्ली और पुडुचेरी का मुखिया उपराज्यपाल होता है। इन राज्यों में राज्यपाल को मु्ख्यमंत्री से ज्यादा अधिकार होते हैं।

जबकि चंडीगढ़ का प्रशासक मुख्य आयुक्त होता है। वहीं पूर्ण राज्य दर्जा प्राप्त राज्यों में राज्य सरकार का मुखिया मुख्यमंत्री होता है। वही सरकार को चलाता है। यहां के सभी विकास कार्यों का निर्णय मुख्यमंत्री अपने मंत्रिमंडल की मदद से लेता है।

लेकिन दिल्ली और अन्य राज्यों में बड़ा अंतर है। वैसे तो दिल्ली केंद्र शासित राज्य है लेकिन यहां मुख्यमंत्री का चुनाव होता है। मंत्रिमंडल भी होता है। लेकिन यहां की पुलिस मुख्यमंत्री के अंडर में नहीं होती है। दिल्ली पुसिस राज्य सरकार नहीं बल्कि केद्र सरकार के तहत काम करती है। 
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