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Maharashtra: 'जनता ही मेरी एकमात्र पार्टी हैं', महाराष्ट्र सरकार में असंतोष की अटकलों के बीच बोले अजित पवार

Fri, 05 Jul 2024 01:05 PM IST
श्वेता महतो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

पिछले हफ्ते विधानसभा में पेश किए गए बजट का बचाव करते हुए अजित पवार ने कहा कि उनके विरोधी उन्हें गालियां दे रहे हैं, क्योंकि वे नहीं चाहते कि विकास का फल नागरिकों को मिले।
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अजित पवार - फोटो : ANI
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विस्तार
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महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार ने लोगों से विकास के लिए उनका समर्थन करने की अपील की। उन्होंने बताया कि राजनीति में कदम रखने के बाद से ही वह अपनी पार्टी से जुड़े हुए हैं। उनके ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोप भी साबित नहीं हुए। उन्होंने कहा कि जनता ही उनकी पार्टी है और जनता का कल्याण करना ही उनकी प्राथमिकता है। 
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महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार ने एक वीडियो मैसेज में कहा, "लोग ही मेरी एकमात्र पार्टी है। मैं जो भी करूं, लोगों का कल्याण ही मेरी प्राथमिकता है। मैं हमेशा लोगों के फायदे के बारे में सोचता हूं।" उन्होंने यह वीडियो लोक सभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद भाजपा, राकांपा और शिवसेना वाले सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के भीतर असंतोष की अटकलों के बीच जारी किया। 

लोकसभा चुनाव में राकांपा का खराब प्रदर्शन
लोकसभा चुनाव में महायुति ने महाराष्ट्र की 48 सीटों में से केवल 17 सीटों पर ही जीत हासिल करने में कामयाब रही। भाजपा ने केवल नौ सीटों पर जीत हासिल की, जबकि 2019 में भाजपा ने महाराष्ट्र में 23 सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं शिवसेना ने नौ सीटों पर और राकांपा को केवल एक सीट पर जीत मिली। 
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अजित पवार ने की जनता से अपील
पिछले हफ्ते विधानसभा में पेश किए गए बजट का बचाव करते हुए अजित पवार ने कहा कि उनके विरोधी उन्हें गालियां दे रहे हैं, क्योंकि वे नहीं चाहते कि विकास का फल नागरिकों को मिले। उन्होंने दावा किया कि उनके ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोप कभी साबित नहीं होंगे। यह कहते हुए अजित पवार ने अपने आलोचकों पर गंदी राजनीति में शामिल होने का आरोप लगाया।

अजित पवार ने लोगों से केवल भाषणबाजी करने वाले राजनेताओं से दूर रहने और काम करने वाले राजनेताओं को वोट देने की अपील की। उन्होंने कहा कि जो काम करते हैं उनकी आलोचना सबसे ज्यादा होती है। बता दें कि पिछले साल जुलाई में अजित पवार ने अपने चाचा और राकांपा के संस्थापक शरद पवार के खिलाफ विद्रोह कर दिया और भाजरा-शिवसेना के साथ गठबंधन में शामिल हो गए। बाद में उन्हें पार्टी का नाम और पार्टी चिह्न भी मिल गया, जबकि शरद पवार की पार्टी का नाम राकांपा-शरदचंद्र पवार रखा गया। 
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