कोरोना वायरस महामारी को लेकर चीन की वुहान वायरोलॉजी लैब एक बार फिर चर्चा में है। कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि यह जानलेवा वायरस इसी लैब से निकला है। हालांकि, चीन इस बात से साफ इनकार करता रहा है। लेकिन, अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन द्वारा कोरोना वायरस की उत्पत्ति की जांच करने के आदेश दिए जाने के बाद इस लैब का नाम फिर उछला है। वहीं, चीन ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि वह कोरोना उत्पत्ति के मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहा है। जानिए क्या चीन ने ही कोरोना वायरस फैलाया है।
पूरी दुनिया के लिए संकट का सबब बने कोरोना वायरस की उत्पत्ति के सवाल का सही जवाब अभी तक नहीं मिल पाया है। अभी भी सवाल ही बना हुआ है। इस वैश्विक महामारी को सामने आए एक साल से अधिक का समय बीत चुका है और अभी भी इस बात पर चर्चा चल रही है कि यह जानलेवा वायरस आया कहां है। इस बारे में प्रमुख तौर पर दो बातें कही जा रही हैं। एक ये कि ये वायरस चमगादड़ों से पैदा हुआ और इंसानों में फैल गया। वहीं, दूसरी बात ये कि वायरस चीन के वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी से निकला है।
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दरअसल, वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी एक उच्च सुरक्षा वाला शोध केंद्र है। यहां ऐसे रोगाणुओं का अध्ययन किया जाता है जो इंसानों में खतरनाक और नई बीमारियां फैला सकते हैं। वहीं, इस लैब में चमगादड़ों में पाए जाने वाले वायरसों पर भी काफी काम किया गया है। साल 2002 में सार्स-कोव-1 वायरस भी यहीं से निकला था, जिसकी वजह से दुनियाभर में करीब 774 लोगों की मौत हो गई थी। इसके अलावा वैज्ञानिकों को दक्षिण-पश्चिम चीन में चमगादड़ों की गुफाओं में भी कोरोना जैसा ही वायरस मिला था।
इस लैब में वैज्ञानिक विभिन्न प्रयोगों के लिए अलग-अलग जानवरों के जेनेटिक मैटेरियल एकत्र करते हैं। यह जानने के लिए कि इंसानों पर इनका क्या असर पड़ सकता है, वैज्ञानिक जीवित वायरस के साथ प्रयोग करते हैं। हालांकि, वायरस बाहर न जा सकें इसके लिए लैब में सुरक्षा के सख्त नियमों का पालन किया जा सकता है। कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि लैब में काम करने वाले कर्मचारियों की लापरवाही के चलते हो सकता है कि वायरस बाहर पहुंच गया हो, इसकी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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हुआनन सीफूड मार्केट भी हो सकती है वजह
कोरोना वायरस महामारी के शुरुआती दौर में हुआनन सीफूड मार्केट को वायरस उत्पत्ति का केंद्र माना जा रहा था। सबसे पहले कोविड चीन के इसी बाजार में फैला था। वहीं, यह बाजार, वुहान लैब के पास में ही है। इसके अलावा अमेरिका की एक फैक्ट शीट में आरोप लगाया गया है कि दिसंबर 2019 में सार्वजनिक रूप से कोरोना का पहला मामला आने से पहले ही वुहान लैब के कई शोधकर्ता बीमार पड़े थे और इनमें कोरोना वायरस महामारी जैसे ही लक्षण थे। हालांकि, अमेरिका ने इस दावे को लेकर कोई सबूत नहीं दिया था।