काउंसिल फॉर साइंटिफिक इंडस्ट्रियल एंड रिसर्च (सीएसआईआर) और नेशनल बॉटेनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनबीआरटी) की ओर से विकसित की गई मधुमेहरोधी आयुर्वेदिक दवा बीजीआर-34 को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिली है। पिछले दो वर्षों में टॉप 20 में शामिल दवाओं में बीजीआर को 14वां स्थान मिला है। टॉप-20 में बीजीआर एकमात्र आयुर्वेदिक दवा है। बाकी सभी दवाएं एलोपैथिक हैं। दो वर्षों में 6367 दवाओं पर अध्ययन के बाद सूची जारी की गई है।
पिछले दो वर्ष में नई दवाओं पर ऑल इंडियन ऑरिजन केमिस्ट्स एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स लिमिटेड (एआईओसीडी) की ओर से अध्ययन किया गया। पिछले माह अध्ययन रिपोर्ट प्रकाशित की गई है। अध्ययन में सभी विधाओं की दवाओं को शामिल किया गया था। इस अध्ययन में पहली बार किसी आयुर्वेदिक दवाओं को टॉप-20 में जगह मिली है।
यह दवा सीएसआईआर की लखनऊ स्थित प्रयोगशाला में एनबीआरआई द्वारा विकसित की गई और इसे अक्तूबर-2015 में बाजार में उतारा गया था। बीजीआर-34 को तैयार करने वाली टीम के प्रमुख वैज्ञानिक ए.के.एस. रावत ने कहा कि यह भारतीय चिकित्सा पद्धतियों और आयुर्वेद के लिए बड़ी उपलब्धि है।