फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मधुमेह या आर्थिक आपदा: भारत पर पड़ेगा 946 लाख करोड़ का बोझ, देश में 21.2 करोड़ पीड़ित; इतनो को इलाज भी नहीं...

Wed, 14 Jan 2026 05:47 AM IST
हिमांशु चंदेल अमर उजाला नेटवर्क

सार

भारत मधुमेह के गंभीर संकट की ओर बढ़ रहा है। देश में 21.2 करोड़ लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं, जिनमें बड़ी आबादी इलाज से बाहर है। विशेषज्ञों के अनुसार यह बीमारी आने वाले वर्षों में 946 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक बोझ डाल सकती है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
विज्ञापन
मधुमेह - फोटो : एएनआई
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारत में मधुमेह अब केवल स्वास्थ्य चुनौती नहीं रह गया है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरे के रूप में उभर रहा है। एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के मुताबिक, मधुमेह के कारण भारत को आने वाले वर्षों में करीब 11.4 लाख करोड़ डॉलर (लगभग 946 लाख करोड़ रुपए) का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
विज्ञापन


यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब देश में 21.2 करोड़ लोग मधुमेह से पीड़ित हैं और इनमें से लगभग 62 प्रतिशत मरीजों को अब तक समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा है। यह रकम भारत के वार्षिक बजट और जीडीपी के बड़े हिस्से के बराबर बैठती है, इसलिए मधुमेह को आर्थिक आपदा कहा जा रहा है।

ये भी पढ़े- चिंताजनक: 2025 तीसरा सबसे गर्म साल, दुनिया 1.5 डिग्री सीमा पार करने की ओर; ध्रुवीय इलाकों में रिकॉर्ड गर्मी
विज्ञापन


मधुमेह की समस्या तेजी से बढ़ रही
भारत में मधुमेह की समस्या जिस तेजी से बढ़ रही है, उसने स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ-साथ आर्थिक ढांचे को भी दबाव में डाल दिया है। नए अध्ययन के अनुसार मधुमेह के कारण होने वाला नुकसान केवल इलाज पर होने वाले खर्च तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे कामकाजी उत्पादकता में गिरावट, समय से पहले काम छोड़ने की मजबूरी और परिवार के सदस्यों पर बढ़ती देखभाल की जिम्मेदारी भी जुड़ी हुई है।
विज्ञापन


देश में मधुमेहर को लकर मरीजों  का 
इन्हीं कारणों से भारत को दुनिया में मधुमेह से होने वाले आर्थिक नुकसान के मामले में दूसरा सबसे अधिक प्रभावित देश माना गया है। दुनिया भर में इस समय करीब 83 करोड़ वयस्क मधुमेह से पीड़ित हैं। इनमें से एक चौथाई से अधिक यानी 21.2 करोड़ लोग भारत में हैं। इसके बाद चीन में 14.8 करोड़ मधुमेह रोगी दर्ज किए गए हैं। अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि यदि मौजूदा रुझान जारी रहे, तो 2050 तक वैश्विक स्तर पर मधुमेह के साथ जीवन जीने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 130 करोड़ तक पहुंच सकती है। यह आंकड़ा स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था, दोनों के लिए गंभीर चुनौती का संकेत है।

अन्य वीडियो-
 
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें