TamilNadu Assembly Election: तमिलनाडु में 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले अन्नाद्रमुक महासचिव ईके पलानीस्वामी ने केए सेंगोट्टैयन को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोपों के बाद निलंबित कर दिया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए टीटीवी दिनाकरन ने कहा है कि पार्टी को आगामी चुनाव में बड़ा राजनीतिक झटका लगेगा।
तमिलनाडु में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों की तरफ से अपनी छवि को सुधारने की कोशिश लगातार जारी है। इस कड़ी में अम्मा मक्कल मुनेत्र कजगम (एआईएडीएमके) ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोपों का सामना कर रहे केए सेंगोट्टैयन को महासचिव ईके पलानीस्वामी ने निलंबित कर दिया है। वहीं पार्टी के इस फैसले की आलोचना करते हुए महासचिव टीटीवी दिनाकरन ने दावा किया कि प्रमुख विपक्षी दल को राजनीतिक झटका लगेगा।
'पलानीस्वामी को सेंगोट्टैयन को निकालने का कोई अधिकार नहीं'
दिनाकरन ने कहा कि पार्टी महासचिव ईके. पलानीस्वामी को सेंगोट्टैयन को निकालने का कोई अधिकार नहीं था। उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले 2026 के विधानसभा चुनाव में जनता पलानीस्वामी को सबक सिखाएगी। उन्होंने कहा कि यह फैसला एआईएडीएमके के लिए राजनीतिक रूप से नुकसानदायक साबित होगा। दिनाकरन ने पत्रकारों से कहा, 'दक्षिण तमिलनाडु की जनता अगला चुनाव आने पर ईके. पलानीस्वामी को सबक सिखाएगी। वह केवल अपने पद और फायदे की सोचते हैं, जनता की नहीं।'
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बीते दिन सेंगोट्टैयन ने निष्कासित नेताओं से की मुलाकात
बता दें कि 31 अक्तूबर को सेंगोट्टैयन ने पार्टी से निकाले गए नेताओं- ओ. पन्नीरसेल्वम, टीटीवी दिनाकरन और वीके शशिकला- से मुलाकात की थी। ये मुलाकात रमनाथपुरम जिले के पासुम्पोन गांव में आयोजित मुथुरामलिंगम थेवर की 118वीं जयंती और 63वें गुरु पूजा समारोह में हुई थी। इस बैठक के बाद सेंगोट्टैयन ने इन नेताओं की पार्टी में वापसी की बात कही थी। हालांकि, इस कदम से एआईएडीएमके नेतृत्व नाराज हो गया और पार्टी ने उन्हें विरोधी गतिविधियों और पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने के आरोप में निष्कासित कर दिया।
'अन्नाद्रमुक का आंतरिक नेतृत्व अब लोकतांत्रिक नहीं रहा'
दिनाकरन ने कहा कि ऐसे फैसले यह दिखाते हैं कि एआईएडीएमके के अंदर नेतृत्व अब लोकतांत्रिक नहीं रहा। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के कई पुराने नेता और कार्यकर्ता इस तरह के फैसलों से नाखुश हैं और जल्द ही इसका असर चुनावों में दिखेगा।