अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम (एएमएमके) के प्रमुख टीटीवी दिनाकरण ने गुरुवार को दावा किया कि अन्नाद्रमुक (एआईएडीएमके) के जो सदस्य सत्तारूढ़ टीवीके में शामिल हुए हैं, वे जल्द ही अपने फैसले पर पछताएंगे और वापस अपनी मूल पार्टी में लौट आएंगे।
दिनाकर ने सरकार गठन के दौरान टीवीके का समर्थन करने वाले कुछ राजनीतिक दलों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि अन्य दलों के विपरीत वह हमेशा एनडीए के प्रति वफादार रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनका तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) का समर्थन करने का कोई इरादा नहीं है। साथ ही उन्होंने इस दावे को झूठा बताया कि अगर मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय सरकार नहीं बनाते तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हो जाता।
टीवीके को सरकार बनाने के लिए किन दलों का समर्थन मिला?
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के सहयोगी दलों विदुतलाई चिरुथाइगल काची (वीसीके), वाम पार्टियों और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) ने विजय के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन दिया था। उनका कहना था कि अगर कोई भी दल सरकार बनाने में सफल नहीं होता तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होने का खतरा था। डीएमके से अलग हो चुकी कांग्रेस के साथ-साथ वीसीके और आईयूएमएल भी विजय मंत्रिमंडल में शामिल हुए।
निजी लाभ के लिए नहीं बदला पाला: दिनाकरन
एएमएमके के महासचिव दिनाकरण ने कहा, 2021 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद भी मैंने निजी लाभ के लिए अन्य नेताओं की तरह अपना पक्ष नहीं बदला। मैंने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में बने रहने का फैसला किया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी को एआईएडीएमके में विलय करने की कोई योजना नहीं है।
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एआईएडीएमके में विलय न करने के क्या कारण बताए?
एआईएडीएमके में विलय न करने के कारणों पर उन्होंने पत्रकारों से कहा कि वह गठबंधन धर्म का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा, 2017 में पार्टी का उप महासचिव होने के बावजूद मुझे एआईएडीएमके से हटा दिया गया था। लेकिन मैंने अम्मा (पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता) के सम्मान में छह महीने तक धैर्य बनाए रखा। बाद में मैंने एएमएमके बनाई और आज भी उसके महासचिव के रूप में कार्य कर रहा हूं।
दिनाकरण ने कहा कि एआईएडीएमके के किसी भी वरिष्ठ नेता, जिला सचिव या पदाधिकारी ने उनसे पार्टी विलय के लिए कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं दिया है और न ही इस संबंध में कोई सहमति बनी है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी पिछले नौ वर्षों से स्वतंत्र रूप से काम कर रही है। उनका राजनीतिक सफर उन कार्यकर्ताओं के साथ आगे बढ़ा है जो वास्तव में वफादार हैं, न कि केवल निजी लाभ या सत्ता की तलाश में हैं।
'दल बदलने की प्रवृत्ति पहले कभी नहीं देखी गई'
एआईएडीएमके नेताओं के टीवीके में जाने पर दिनाकरण ने कहा कि इसके पीछे मुख्य कारण व्यक्तिगत हित हैं, न कि संगठन की कोई कमजोरी। उन्होंने कहा कि वह किसी व्यक्ति के निजी फैसले की आलोचना नहीं करेंगे। लेकिन पार्टी नेतृत्व पर आरोप लगाकर पार्टी छोड़ने की प्रवृत्ति तमिलनाडु की राजनीति में पहले कभी नहीं देखी गई। दिनाकरण ने कहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एआईएडीएमके के कुछ साथी टीवीके में शामिल हो गए। उन्हें जल्द ही अपने फैसले पर पछतावा होगा और वे फिर से अपनी मूल पार्टी में लौट आएंगे।
उन्होंने सत्तारूढ़ टीवीके सरकार की भी आलोचना की और उसे पिछली डीएमके सरकार का ही विस्तार बताया। उनका दावा है कि सरकार बदलने के बाद राज्य में चेन स्नैचिंग और यौन हिंसा जैसी घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है।