डीजीसीए ने केबिन क्रू के लिए ड्यूटी और रेस्ट पीरियड से जुड़ी नई ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी की हैं। इन नियमों के तहत अब अधिकतम उड़ान अवधि, लैंडिंग की सीमा और विश्राम समय को सख्ती से परिभाषित किया गया है।
नागरिक उड्डयन सुरक्षा नियामक डीजीसीए ने केबिन क्रू के लिए ड्यूटी और विश्राम अवधि से जुड़ी नई ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी की हैं। इन प्रस्तावित नियमों का उद्देश्य हवाई सुरक्षा को और मजबूत बनाना तथा उड़ान परिचालनों के दौरान क्रू मेंबर्स की थकान को कम करना है।
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उड़ान अवधि अब 12.5 घंटे तक
जारी ड्राफ्ट के अनुसार, अधिकतम उड़ान ड्यूटी अवधि 11 घंटे तय की गई है, जिसके दौरान छह लैंडिंग की अनुमति होगी। अगर उड़ान अवधि 11.30 घंटे है, तो अधिकतम पांच लैंडिंग, और 12 घंटे तक की ड्यूटी के लिए चार लैंडिंग की सीमा रखी गई है। वहीं 12.30 घंटे की ड्यूटी के लिए अधिकतम तीन लैंडिंग की अनुमति होगी।
डीजीसीए ने कहा कि अधिकतम उड़ान समय आठ घंटे से अधिक नहीं होना चाहिए। यदि केबिन क्रू 9 घंटे की उड़ान करता है, तो उसकी अधिकतम ड्यूटी अवधि 14 घंटे और अधिकतम दो लैंडिंग की जा सकेगी। वहीं 10 घंटे की उड़ान और 15 घंटे ड्यूटी अवधि के लिए सिर्फ एक लैंडिंग की अनुमति होगी। ड्राफ्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ड्यूटी अवधि उस समय से शुरू होती है जब केबिन क्रू को रिपोर्ट करने के लिए कहा जाता है और यह उस वक्त समाप्त होती है जब वह सभी जिम्मेदारियों से मुक्त हो जाता है।
विश्राम समय भी तय
रेस्ट अवधि के नए प्रावधानों के अनुसार, उड़ान से पहले क्रू मेंबर्स को कम से कम पिछली ड्यूटी अवधि के बराबर विश्राम दिया जाएगा। वहीं, 3 टाइम जोन पार करने पर 12 घंटे, 7 टाइम जोन तक पार करने पर 18 घंटे और 7 से अधिक टाइम जोन पार करने पर 36 घंटे का विश्राम अनिवार्य होगा। डीजीसीए ने कहा कि किसी भी 24 घंटे की अवधि में अधिकतम ड्यूटी समय अनुमत उड़ान ड्यूटी अवधि से एक घंटे अधिक नहीं होना चाहिए।
एविएशन विशेषज्ञों के अनुसार, इन नए नियमों से हवाई यात्राओं की सुरक्षा और केबिन क्रू के मानसिक-शारीरिक स्वास्थ्य दोनों में सुधार होगा। यह कदम भारत के विमानन क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप लाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।