1. बार-बार सामने आ रही तकनीकी खामियां
डीजीसीए की रिपोर्ट में कहा गया है कि कई विमानों में पहले दर्ज की गई खामियां बार-बार सामने आ रही हैं। इससे साफ होता है कि इन खामियों की सही निगरानी नहीं हो रही और मरम्मत कार्य भी ठीक से नहीं किया जा रहा। इसके अलावा ग्राउंड हैंडलिंग के उपकरण जैसे बैगेज ट्रॉली, बीएफएल आदि भी खराब हालत में पाए गए। विमानों की लाइन मेंटेनेंस और टूल्स की जांच संबंधी प्रक्रिया का भी ठीक से पालन नहीं हुआ।
2. विमान रखरखाव में लापरवाही
- विमानों के रखरखाव के दौरान कई सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया गया। जैसे:
- मेंटेनेंस का काम ऑर्डर के अनुसार नहीं हुआ।
- थ्रस्ट रिवर्सर सिस्टम और फ्लैप स्लैट लीवर लॉक नहीं किए गए।
- विमान रखरखाव मैनुअल के मुताबिक सुरक्षा उपाय नहीं अपनाए गए।
- कई बार एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर ने खामी दूर करने में लापरवाही दिखाई।
- एयरक्राफ्ट सिस्टम द्वारा बताई गई खराबियों को तकनीकी लॉगबुक में दर्ज नहीं किया गया।
- कुछ सीटों के नीचे लाइफ जैकेट्स ठीक से नहीं रखे थे।
- विमान के दाएं विंगलेट पर लगा जंग रोधी टेप क्षतिग्रस्त पाया गया।
3. हवाई अड्डों की स्थिति भी चिंताजनक
- एक हवाई अड्डे पर रनवे की बीच की लाइन फीकी पाई गई।
- टैक्सीवे की ग्रीन लाइट्स एक दिशा में नहीं थीं।
- हवाई अड्डे के चारों ओर नई इमारतें बनने के बावजूद पिछले तीन वर्षों से कोई सर्वे या बाधा आंकलन नहीं किया गया।
- रैम्प एरिया में कई वाहन बिना स्पीड कंट्रोल डिवाइस के पाए गए। ऐसे वाहनों के परमिट रद्द कर दिए गए और उनके चालकों के पास रद्द कर दिए गए।
4. सिम्युलेटर की खराब स्थिति
डीजीसीए ने एक सिम्युलेटर की जांच के दौरान पाया कि उसकी सेटिंग और सॉफ्टवेयर विमान के मौजूदा कॉन्फिगरेशन से मेल नहीं खाते थे। इसका सॉफ्टवेयर भी अपडेट नहीं किया गया था।
5. टायर घिसने के कारण फ्लाइट रद्द
एक घरेलू उड़ान को टायर घिस जाने के कारण उड़ान भरने से पहले ही रद्द करना पड़ा। बाद में आवश्यक मरम्मत के बाद ही विमान को उड़ान की अनुमति दी गई।