अमरनाथ गुफा में श्रद्धालु अब बाबा बर्फानी के जयकारे लगा सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के उस आदेश को दरकिनार कर दिया जिसमें बाबा बर्फानी परिसर को ‘साइलेंस जोन’ घोषित किया गया था। एनजीटी के 13 दिसंबर के आदेश को अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने चुनौती दी थी।
न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ के समक्ष बोर्ड ने यह कहकर ट्रिब्यूनल के फैसले को चुनौती दी कि एनजीटी ने स्वत: यह आदेश पारित कर दिया जबकि वादी ने यह मसला उठाया ही नहीं था। बोर्ड की ओर से वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि एनजीटी के समक्ष मामला वैष्णो देवी मंदिर परिसर में घोड़े और खच्चरों पर प्रतिबंध लगाने तक सीमित था लेकिन एनजीटी ने अमरनाथ मामले पर संज्ञान लेकर आदेश पारित कर दिया।
रोहतगी ने कहा कि एनजीटी ने बाबा बर्फानी के समक्ष घंटी बजाने, प्रसाद चढ़ाने और जयकारे लगाने पर रोक लगा दी थी। इस पर पीठ ने सवाल किया कि आखिर एनजीटी क्या कहना चाहती है? रोहतगी ने दलील दी कि आखिर श्रद्धालुओं को प्रसाद ले जाने से मना कैसे किया जा सकता है। इससे लोगों की धार्मिक भावनाएं जुड़ी हुई हैं। इस पर पीठ ने सुझाव दिया कि बोर्ड द्वारा प्रसाद मुहैया कराया जा सकता है।
मालूम हो कि गत 13 दिसंबर को एनजीटी ने अमरनाथ गुफा को 'साइलेंस जोन’ घोषित कर दिया था और हिमस्खलन से रोकने के मद्देनजर बाबी बर्फानी के समक्ष श्रद्धालुओं को शांति बनाए रखने के लिए कहा था।