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सियासत: शरद पवार पर बरसे देवेंद्र फडणवीस, एनसीपी पर लगाया तुष्टीकरण की राजनीति और समाज का ध्रुवीकरण करने का आरोप

Thu, 14 Apr 2022 06:38 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

फडणवीस ने कहा कि शरद पवार ने 'द कश्मीर फाइल्स' फिल्म की आलोचना इसलिए की क्योंकि यह उनके फर्जी धर्मनिरपेक्ष एजेंडे के अनुरूप नहीं है।
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देवेंद्र फडणवीस - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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वरिष्ठ भाजपा नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ने गुरुवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख शरद पवार को निशाने पर लिया। धारा 370, फिल्म 'द कश्मीर फाइल्स' और इशरत जहां समेत विभिन्न मुद्दों पर पवार के बयानों को लेकर फडणनवीस ने उन पर हमला बोला। फडणवीस ने आरोप लगाया कि पवार की पार्टी तुष्टीकरण की राजनीति कर रही है और सांप्रदायिक आधार पर समाज का ध्रुवीकरण करने की कोशिश कर रही है।

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राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता फडणवीस ने अपने सिलसिलेवार ट्वीट्स में शरद पवार पर भारतीय संविधान के रचयिता डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर के मूल्यों और उनकी इच्छाओं के खिलाफ काम करने का आरोप भी लगाया। संयोग से बाबा साहेब की गुरुवार को 131वीं जयंती भी है। भाजपा नेता ने पवार पर तीखे शब्द बाण छोड़ते हुए यह आरोप भी लगाया कि वह पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने 'हिंदू आतंक' शब्द का इस्तेमाल किया। 

पवार ने हाल ही में 'द कश्मीर फाइल्स' फिल्म की आलोचना की थी। इसे लेकर फडणवीस ने कहा कि उनकी आलोचना एनसीपी की दशकों से चले आ रहे तुष्टीकरण की राजनीति और सांप्रदायिक आधार पर समाज को बांटने की कोशिशों के ट्रैक रिकॉर्ड से एकदम मेल खाती है। उन्होंने अपने ट्वीट्स में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स का उल्लेख भी किया। इन मीडिया रिपोर्ट्स में शरद पवार की ओर से दिए गए कई विवादित बयानों का जिक्र किया गया है।
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उन्होंने कहा कि पवार ने कश्मीर फाइल्स की आलोचना इसलिए की क्योंकि यह उनके फर्जी धर्मनिरपेक्ष एजेंडे के अनुरूप नहीं है। फडणवीस ने कहा, 'कश्मीरी पंडितों की पीड़ा के वास्तविक अनुभवों पर आधारित फिल्म किसी को परेशान क्यों करती है? यह फिल्म किसी धर्म के खिलाफ नहीं है। लेकिन यह उनके खिलाफ है जिन्होंने तब अपनी नजरें फेर ली थीं जब लोग संकट का सामना कर रहे थे, क्योंकि इससे उनको राजनीतिक लाभ मिले थे।'

देवेंद्र फडणवीस ने आगे कहा कि साल 2012 में जब महाराष्ट्र की सत्ता में कांग्रेस और एनसीपी मौजूद थीं, तब मुंबई के बीचोंबीच आजाद मैदान में शर्मनाक हिंसा हुई थी। उस समय अमर जवान ज्योति को नुकसान पहुंचाया गया था। लेकिन, उस समय राज्य का गृह विभाग संभाल रही एनसीपी ने इस घटना के आरोपियों को लेकर नरमी बरती थी और उनके खिलाफ कार्रवाई करने के स्थान पर उन्होंने मुंबई पुलिस आयुक्त का ही तबादला कर दिया था।

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