अब चीन और पाकिस्तान जैसे दुश्मन देश लेह-लद्दाख के इलाके में अपनी नजरें भी नहीं टिका सकेंगे। भारत ने सुरक्षा के नजरिये से लेह और लद्दाख की हवाई सीमाएं अत्याधुनिक तरीके से चाक चौबंद कर दी हैं। जिस पैंगोंग झील के इलाके में चीनी सैनिकों ने घुसपैठ करने की कोशिश की थी वहां पर जल्द एक एयरपोर्ट बनाने की मंजूरी मिल गई है। इसके अलावा केंद्र सरकार लेह लद्दाख इलाके में तीन और नए एयरपोर्ट बनाने जा रही है। जबकि एलएसी के पास तीन दर्जन से ज्यादा हेलीपैड भी बनाए जाएंगे। जहां से सीमा पर चिनूक के माध्यम से नजर रखी जाएगी। अभी लेह में सिर्फ एक एयरपोर्ट है।
सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की लद्दाख यात्राओं के दौरान ही इस बात की सहमति बन गई थी कि इस इलाके को सैन्य दृष्टिकोण से और मजबूत किया जाएगा। भौगोलिक दृष्टिकोण से पूरे इलाके को वायु सेना के माध्यम से ही सबसे ज्यादा मजबूती दी जा सकती है। इसीलिए इस इलाके को वायुसेना के लिहाज से सबसे मजबूत करने की योजना बनी।
सूत्रों के मुताबिक पैंगोंग झील के पास चांगटांग इलाके में एक नए एयरपोर्ट बनाए जाने की मंजूरी मिली है। इसके अलावा लेह लद्दाख के अलग-अलग इलाकों में तीन और नए एयरपोर्ट बनाने की भी मंजूरी मिली है। लद्दाख केंद्र शासित राज्य बनने के बाद से स्थानीय प्रशासन ने भी सुरक्षित सीमा और बेहतर पर्यटन के लिहाज से कई प्रस्ताव भेजे हैं। जबकि स्थानीय सांसद जामयांग सेरिंग नामग्याल ने भी कई प्रस्ताव न सिर्फ स्थानीय प्रशासन बल्कि केंद्र सरकार को दिए हैं। सांसद नामग्याल के मुताबिक लद्दाख की सीमाओं पर मौजूद हमारी सेनाएं बहुत मजबूती से डटी हुई हैं। अपनी सीमाओं को और मजबूत करने के लिए हमारी सरकार हमेशा से मजबूती से खड़ी है।
लद्दाख पर सरकार के विशेष ध्यान देने से ही वायुसेना के लिहाज से इस पूरे इलाके को और मजबूत बनाया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक सिर्फ इस इलाके में चार नए एयरपोर्ट ही नहीं बनाए जाएंगे बल्कि एलएसी के पास 37 हेलीपैड भी तैयार किए जाएंगे। सूत्रों का कहना है यह हेलीपैड चिनूक हेलिकॉप्टरों की लैंडिंग के लिहाज से तैयार किए जाएंगे। ताकि किसी इमरजेंसी के दौरान इनका इस्तेमाल किया जा सके। इसके अलावा पूरे बॉर्डर के इलाके में वायु सेना की मजबूती के लिहाज से बहुत सारे इलाकों को चिन्हित किया गया है। जहां पर क्रमबद्ध तरीके से सेना को मजबूती के साथ तैनात किया जाएगा। ताकि दुश्मन की किसी भी नजर और किसी भी हरकत को सेकेंड्स में न सिर्फ पकड़ा जा सके बल्कि उसको नेस्तनाबूद भी किया जा सके।
लद्दाख इलाके में तैनात रहे रिटायर्ड ब्रिगेडियर हरबंस कहते हैं वैसे तो एलएसी पर भारत पहले से बहुत चाक-चौबंद है, लेकिन बीते कुछ समय से चीन की नापाक हरकतों से हमें और बॉर्डर सुरक्षित करना ही होगी। हवाई सेना के लिहाज से एयरपोर्ट बनाना और हेलीपैड बनाना निश्चित तौर पर हमारी सेना को मदद देगा।
ब्रिगेडियर हरबंस के मुताबिक भौगोलिक दृष्टिकोण से इस पूरे इलाके में हवाई सेना के माध्यम से ही सबसे बेहतरीन तरीके से नजर रखी जाती रही है। इस लिहाज से हमें अपनी ताकत को हमेशा पहचानते हुए उसको और मजबूत करते रहना चाहिए। चंडीगढ़ एयरबेस से रिटायर्ड वायु सेना के विंग कमांडर ओपी शर्मा कहते हैं सैन्य दृष्टिकोण से यह फैसला अहम है। अभी लेह लद्दाख के इलाके में चंडीगढ़ एयरवेज से ही ज्यादातर ऑपरेशनल एक्टिविटीज होती हैं। नई संस्थाओं और सुविधाओं के शुरू होने से लेह लद्दाख के इलाके को और ज्यादा मजबूती मिलेगी।