आजादी के 75 सालों में उत्तराखंड की सबसे बड़ी उपलब्धि अलग राज्य की स्थापना रही। उत्तर प्रदेश के दौर में आर्थिक पिछड़ेपन के दौर से बाहर निकलकर अलग राज्य के तौर पर उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था फर्राटे से दौड़ी। 20 वर्षों के अंतराल में राज्य की अर्थव्यवस्था का आकार 14 गुना बड़ा हो चुका है। 9 नवंबर, 2000 को उत्तराखंड राज्य अस्तित्व में आया। तब राज्य का बजट केवल 924 करोड़ रुपये था। अब इसमें करीब 55 गुना की वृद्धि हो चुकी है।
खेती, उद्योग और पर्यटन उत्तराखंड राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। राज्य की अर्थव्यवस्था कृषि, बागवानी, पशुपालन, वन, खनन, विनिर्माण, निर्माण, व्यापार, होटल व रेस्टोरेंट तथा अन्य सेवा क्षेत्रों पर निर्भर है। 2013 की केदारनाथ जल प्रलय और कोविड 19 महामारी में राज्य का पर्यटन व अन्य कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुए। इसका असर राज्य की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई दिया। उत्तर प्रदेश में रहते हुए इस पर्वतीय क्षेत्र का आर्थिक पिछड़ापन अलग राज्य की मांग का मूल आधार बना। पहाड़ की जवानी और पानी पहाड़ के काम आए। इस मांग के लिए दुनिया का अनूठा कामयाब जनांदोलन अलग राज्य के लिए हुआ।