Gujarat: पहलगाम आतंकी हमले में अपने पति और बेटे को खोने वाली काजलबेन परमार ने भारतीय सेना की ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के लिए सराहना की और पाकिस्तान को पूरी तरह खत्म करने की अपील की। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद दिया और कहा कि इस तरह की कार्रवाई जारी रहनी चाहिए। वहीं, अपने पति को खोने वाली शीतलबेन कलाठिया ने कहा कि जो भी कार्रवाई हुई है, सही हुई है।
पहलगाम आतंकी हमले में अपने पति और बेटे को खोने वाली गुजरात के भावनगर की काजलबेन परमान ने बुधवार को 'ऑपरेशन सिंदूर' के लिए भारतीय सेना की सराहना की। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि पाकिस्तान को पूरी तरह खत्म करने तक कार्रवाई जारी रखी जाए।
विज्ञापन
'पीएम मोदी का धन्यवाद, जारी रखें कार्रवाई'
उन्होंने कहा, 'मैं पाकिस्तान पर की गई एयर स्ट्राइक पर बहुत गर्व महसूस कर रही हूं। भारतीय सेना को सलाम और भारत माता की जय।' काजलबेन ने कहा, 'मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देती हूं और आग्रह करती हूं कि ऐसे ही हमले करते रहें और पाकिस्तान को खत्म कर दें।'
काजलबेन के पति यतीश परमार और बेटा स्मित उन 26 लोगों में शामिल थे, जिनकी 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने हत्या कर दी थी। स्मित परमार 12वीं कक्षा में पढ़ता था और भारतीय सेना में शामिल होकर देश सेवा करना चाहता था। उनके बड़े बेटे अभिषेक परमान ने कहा, पीएम मोदी ने 15वें दिन पाकिस्तान को जवाब दिया है, इससे मैं खुश हूं। मैंने अपने पिता और भाई को खो दिया, पर अब सरकार ने सही जवाब दिया है।
सरकार पर पूरा भरोसा, जो किया सही किया: शीतलबेन कलाठिया
सूरत की शीतलबेन कलाठिया ने पहलगाम हमले में अपने पति शैलेश को खो दिया था। उन्होंने भारत की सैन्य कार्रवाई के लिए सरकार की सराहना की। उन्होंने कहा, मेरे पति को हिंदू-मुस्लिम के नाम पर गोली मार दी गई। हमें सरकार पर पूरा भरोसा है और जो अब तक किया है, वह सही किया है। आगे भी सरकार सही कदम उठाएगी, हमें पूरा यकीन है। शीतलबेन ने बताया कि उनके पति परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे और उनकी बेटी अभी तक उस घटना से उबर नहीं पाई है। उन्होंने गुजरात सरकार से अपील की कि बच्चों की पढ़ाई और भविष्य के लिए मदद की जाए।
भारतीय सेना ने दिया ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम
6 से 7 मई की दरमियानी रात को 1:05 बजे से लेकर 1:30 बजे तक सशस्त्र बलों ने ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया। 25 मिनट के इस ऑपरेशन में 24 मिसाइलों के जरिए नौ आतंकी शिविरों को ध्वस्त कर दिया गया। इन नौ ठिकानों में से पांच पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में थे, वहीं चार पाकिस्तान में थे। इन ठिकानों में आतंकियों को भर्ती किया जाता था। उन्हें प्रशिक्षित किया जाता था। उनके दिमाग में जहर भरा जाता था।