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Corona vaccine: जी-7 के वादे के बावजूद कई देशों को टीके का इंतजार

Sun, 20 Jun 2021 07:06 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली

सार

शुरुआत में दक्षिण एशिया के छोटे देशों ने भारत से दान में मिली और सीरम इंस्टीट्यूट से खरीदी वैक्सीनों से टीकाकरण शुरू किया था।
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कोरोना टीका - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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जी -7 समूह के वादे के बावजूद कई दक्षिण एशियाई देश अब भी टीके पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। जन स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि जी-7 का संकल्प असल में बहुत अस्पष्ट है , जिसके चलते गरीब देशों के करोड़ों लोगों की बहुत कम जरूरत पूरी हो पाई है।

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लेकिन, फिर महामारी की दूसरी लहर के बाद भारत से निर्यात पर रोक के चलते इन देशों में टीकाकरण में काफी रुकावट आ गई। भारत के अलावा इन गरीब देशों के पास बहुत कम विकल्प हैं, जिनसे ये टीके मांग सकते हैं।

गौरतलब है कि अमेरिका और दूसरी वैश्विक शक्तियों ने इन देशों को एक अरब खुराक देने का वादा किया था। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने महामारी से जीतने के लिए अभी 11 अरब खुराकों की जरूरत बताई है।
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नेपाल ने की टीकों की अपील 
नेपाल में एस्ट्राजेनेका की पहली खुराक मार्च में लेने के बाद 65 साल से ऊपर के 14 लाख दूसरी खुराक के इंतजार में हैं। भारत से निर्यात रुकने पर नेपाल ने अमेरिका, ब्रिटेन और डेनमार्क में कूटनीतिज्ञों से टीके दिलाने की अपील की है।
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नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका को चीन की सिनोफार्मा वैक्सीन मिली है। लेकिन नेपाल की तरह श्रीलंका भी एस्ट्राजेनेका के ज्यादा टीके चाह रहा है। 

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