अमेरिका उन देशों पर बारीकी से नजर रखे हुए है जो रूस से हथियार खरीद रहे हैं। कई देशों पर उसने आर्थिक प्रतिबंध भी लगाए हुए हैं। मगर अमेरिकी धमकी के बावजूद भारत रूस के साथ अपने द्वीपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने में लगा हुआ है। भारत रूस के साथ कई हथियार सौदों पर हस्ताक्षर करने वाला है। इसी सिलसिले में पिछले महीने ही सेनाध्यक्ष बिपिन रावत रूस की यात्रा पर गए थे।
अब नौसेना के मुखिया एडमिरल सुनील लंबा रूस जाने वाले हैं। एडमिरल लंबा देश के वरिष्ठ सेनाधिकारी हैं और वह स्टाफ कमेटी के प्रमुखों के अध्यक्ष भी हैं। रूस की अपनी चार दिवसीय यात्रा के दौरान वह अपने समकक्ष एडमिरल व्लादिमीर कोरोलेव के साथ सेंट पीटर्सबर्ग में सोमवार को बातचीत करेंगे। एक अधिकारी ने कहा, 'इस यात्रा का उद्देश्य रूस के साथ द्वीपक्षीय सैन्य रिश्तों को मजबूत करना और रक्षा समन्वय के नए रास्ते ढूंढना है।'
मॉस्को में नौसेनाध्यक्ष जनरल वीवी गेरासिमोव, जनरल स्टाफ के मुखिया, रक्षा मंत्री के सचिव दिमित्री शुगेव और सैन्य तकनीकी सहयोग के लिए संघीय सेवा निदेशक के निदेशक के साथ वार्ता करेंगे। वह कुछ रूसी रक्षा प्रतिष्ठानों जैसे कि नाखिमोव नेवल स्कूल और एडमिराल्टी शिपयार्ड और मिलिट्री एकेडमी ऑफ द जनरल स्टाफ ऑफ द आर्म्ड फोर्सेस का भी दौरा करेंगे। यह यात्रा ऐसे समय पर की जा रही है जब भारत और रूस ने भारतीय नौसेना के लिए 4000 टन की ग्रिगोरिविच या तलवार मिसाइल से लैस फ्रिगेट (युद्धपोत) के 8000 करोड़ रुपये के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
जहां दो युद्धपोतों को रूस से आयात किया जाएगा वहीं दो का गोवा के शिपयार्ड में तकनीक का हस्तांतरण करके निर्माण होगा। इस पूरे सौदे की कीमत 13,000 करोड़ रुपये है। इससे पहले 5 अक्तूबर को भारत ने 39,000 करोड़ रुपये की एस-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम की डील पर हस्ताक्षर किए थे। रूस से एस-400 सिस्टम खरीदने की वजह से अमेरिका ने अपने नए कानून काउंटरिंग अमेरिका एडवर्सरिज थ्रू सेंक्शन एक्ट (काट्सा) के जरिए चीन पर प्रतिबंध लगाए हैं। इस कानून के जरिए वह देशों को ईरान से तेल और रूस से हथियार खरीदने से रोकता है। भारत को उम्मीद है कि ट्रंप प्रशासन उसे छूट देगा। रूस और अमेरिका के साथ संतुलन बनाने के लिए भारत ने अमेरिका से एमएच-60 रोमियो हेलिकॉप्टर खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है। यह डील 13,500 करोड़ रुपये की है।