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राज्यसभा के उपसभापति पद पर खिंची पक्ष-विपक्ष में तलवारें, एक-एक वोट के लिए होगी जंग

Thu, 05 Apr 2018 06:30 AM IST
शरद गुप्ता, नई दिल्ली
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उपसभापति पीजे कुरियन - फोटो : FILE PHOTO
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सरकार और विपक्षी दलों के बीच चल रही रस्साकशी का अगला मुकाबला राज्यसभा के उपसभापति के पद पर चुनाव को लेकर होगा। मौजूदा उपसभापति पीजे कुरियन का कार्यकाल एक जुलाई के समाप्त हो रहा है और उससे पहले नए उपसभापति का चुनाव होना तय है।

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हालांकि उपसभापति का पद सबसे बड़े विपक्षी दल को दिए जाने की परंपरा है। लेकिन पिछले सप्ताह हुए राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनावों में मिली सफलता के बाद भारतीय जनता पार्टी का उत्साह बढ़ गया है। 65 सीटों के साथ वह राज्यसभा में सबसे बड़ी पार्टी बन गई है और इसीलिए वह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के किसी आदमी को ही उपसभापति की कुर्सी पर बिठाने की सोच रही है।

दरअसल, संख्या गणित में एनडीए और विपक्ष दोनों के पास ही लगभग 108 सांसद हो रहे हैं। यही दोनों पक्षों के लिए सबसे बड़ी मुश्किल है। बीजू जनता दल और तेलंगाना राष्ट्र कांग्रेस चूंकि कांग्रेस और भाजपा से बराबर दूरी बनाकर रखना चाहती है, इसलिए उनके छह-छह सांसद वोटिंग से दूर ही रहेंगे। इसी फोटो फिनिश की संभावना के मद्देनजर दोनों पक्ष ऐसी रणनीति बनाना चाहते हैं जिससे उन्हें विजयश्री की प्राप्ति हो।
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एनडीए खेमा
एनडीए में भाजपा के अलावा शिवसेना (3), अकाली दल (1), जनता दल (यू) (6), पीडीपी (2), रिपब्लिक पार्टी (अठावले) (1), बोडो पीपुल्स फ्रंट (1) और नागा पीपुल्स फ्रंट (1) जैसे दल हैं। वहीं उसे अन्ना डीएमके (13), वाईआरएस कांग्रेस (2) जैसे कुछ गैर-एनडीए दलों का साथ मिलने की भी उम्मीद है। इनके अलावा निर्दलीय (6) और नामांकित (8) सांसदों में से अधिकतर सरकार के पक्ष में दे सकते हैं।

विपक्षी खेमा
वहीं विपक्ष में कांग्रेस के 51 सांसदों के अलावा तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के 13-13 सांसद, सीपीआई (1), सीपीएम (5), आम आदमी पार्टी (3), द्रमुक (4), बसपा (4), नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (4), मुस्लिम लीग (1), झारखंड मुक्ति मोर्चा (1), इंडियन नेशनल लोकदल (1) और राष्ट्रीय जनता दल (5) सांसद शामिल हैं।

विपक्ष का दलित कार्ड!
ऐसे में विपक्ष ने किसी दलित को उपसभापति चुनने की पेशकश की है। देश भर में दलित आंदोलन के चलते सरकार की छवि पर असर पड़ रहा है। ऐसे में विपक्ष को उम्मीद है कि यदि उनका उम्मीदवार दलित होगा तो अठावले और राम विलास पासवान तैसे एनडीए के कई घटक धर्म संकट में पड़ सकते हैं।

शिवसेना का होगा उम्मीदवार?
उधर, भाजपा चाहती है कि वह शिवसेना के किसी नेता को उपसभापति पद पर बिठाए। इससे उस शिवसेना की नाराजगी कुछ कम होगी जो सरकार से अपने मंत्रियों का इस्तीफा दिलाने के बाद अगला लोकसभा चुनाव भाजपा के साथ तालमेल के बगैर ही लड़ने का एलान कर चुकी है। हालांकि अभी शिवसेना ने भाजपा के प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया नहीं दी है लेकिन उस लगता कि यदि शिवसेना उपसभापति का पद स्वीकार करती है तो उसके साथ भाजपा के गठबंधन बरकरार रहने की उम्मीद अभी बाकी रहेगी। 

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