देवरिया कांड की जांच के लिए पुलिस लाइन सभागार और पीडब्लूडी डाक बंगले में अफसरों को बुलाकर बंद कमरे में एसआईटी टीम ने सवालों की बौछार की। कई बार तीखे सवाल सुनकर अफसरों की सांसें अटक गईं। घबराहट और बेचैनी छिपाने के लिए वह बार-बार पानी पीते रहे। इसके बावजूद उनके पास कई सवालों के जवाब नहीं थे। इसके लिए अफसर समय मांगते रहे।
एसआईटी 13 अगस्त से पहले तक प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंपने की जिम्मेदारी के चलते तत्परता से छानबीन कर रही है। संचालिका गिरिजा त्रिपाठी पर पांच अगस्त और 30 जुलाई को दर्ज केस से जुड़ी सभी पत्रावलियों को अपने कब्जे में लेकर दोनों विवेचकों को तलब किया। उनसे अब तक की विवेचना में आए तथ्यों के बारे में जानकारी ली। इसके बाद अन्य अफसरों से बारी-बारी पूछताछ की।
सूत्रों के मुताबिक टीम ने जब मनाही के बाद भी संस्था में पुलिस की ओर से लड़कियों को रखे जाने के बारे में पूछा तो जिम्मेदार अधिकारी बगलें झांकने लगे। उन्होंने कोर्ट के आदेश का हवाला दिया, पर किसी भी तरह का कोई आदेश नहीं पेश कर सके।
बाल कल्याण समिति का भी कोई सहमति पत्र नहीं था। डीपीओ प्रभात कुमार ने कार्यभार संभालने के बाद से अपनी ओर से की गई कार्रवाइयों का हवाला दिया, जबकि जिला बाल संरक्षण इकाई के प्रभारी जेपी तिवारी ने बाल अधिकारों के साथ किसी भी संस्था में बच्चों को रखे जाने की प्रक्रिया समझाई।
विदेशियों का पता तस्दीक करने में जुटी एलआईयू
बता दें कि स्टेशन रोड स्थित बालगृह से तीन बच्चों को विदेशियों ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के तहत गोद लिया है। अब एसआईटी टीम मामले की जांच कर रही है। कुछ दिनों में ही यहां सीबीआई धमकने वाली है। इसी बीच एलआईयू टीम ने विदेशियों का पता तस्दीक करना शुरू कर दिया है। पता कराया जा रहा है कि जिन लोगों ने गोद लिया है, उनके घर बच्चे सुरक्षित हैं या नहीं। अन्य जानकारी भी मांगी जा रही है।