डेंगू से संक्रमित गर्भवती महिलाओं में कमजोर शिशुओं को जन्म देने का जोखिम ज्यादा है। जन्म के बाद शिशुओं को लंबे समय तक अस्पतालों में भर्ती भी रखना पड़ सकता है। यह जोखिम जन्म से तीन वर्ष की आयु तक रहने की आशंका है। मच्छर जनित रोगों का यह प्रभाव एक चिकित्सा अध्ययन में सामने आया है जिसे बर्मिंघम विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने ब्राजील के मरीजों पर किया है। इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने ब्राजील का चयन इसलिए किया क्योंकि यहां मच्छरों से फैलने वाली कई उष्णकटिबंधीय बीमारियां आम हैं। इनमें मलेरिया, डेंगू, जीका, चिकनगुनिया और पीला बुखार शामिल है।
जागरूकता से टाला जा सकता है खतरा
वहीं एसोसिएट प्रोफेसर मार्टिन फोरेक्स कोप्पेंस्टीनर का कहना है कि अस्पताल में भर्ती होने और मातृ संक्रमण के कारण चल रही स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को जागरूकता और बेहतर नीति से टाला जा सकता है। जलवायु परिवर्तन के कारण डेंगू संक्रमण के प्रसार में तेजी आने की आशंका भी काफी अधिक है। ऐसे में सभी देशों को अपनी नीति में बदलाव कर मच्छरों के खिलाफ जमीनी स्तर पर काम करना चाहिए।
दिख सकते हैं दीर्घकालिक प्रभाव
बर्मिंघम विवि के सहायक प्रोफेसर लिविया मेनेजेस का कहना है कि डेंगू संक्रमित गर्भवती महिला से जन्म लेने वाले शिशुओं में दीर्घकालिक प्रभाव हो सकते हैं। अभी तक के अध्ययन बताते हैं कि जन्म के समय शिशु का कम वजन उसकी वयस्कता पर गलत असर डाल सकता है। ऐसे शिशुओं को तीन वर्षों के दौरान अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम 27% तक देखा गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि संक्रमित महिलाओं से पैदा होने वाले बच्चों और जन्म के समय कम वजन वाले बच्चों का जोखिम क्रमशः 67 और 133 फीसदी बढ़ा है।