एनआईवी के वरिष्ठ वैज्ञानिक बाबासाहेब वी. टंडाले ने कहा है कि भारतीय आबादी में डेंगू का प्रसार काफी अधिक है। इसकी झलक पुणे के सीरो सर्वे में मिली है। देश के बाकी शहरों और क्षेत्रों में भी इस तरह का सर्वे होना चाहिए ताकि राष्ट्रीय स्तर पर एक वास्तविक आंकड़ा मिल सके।
मच्छर जनित रोग डेंगू धीरे-धीरे पूरी आबादी को अपनी चपेट में लेने लगा है। इसका खुलासा महाराष्ट्र के पुणे शहर में हुआ है, जहां सीरो सर्वे के दौरान 88 फीसदी लोगों में डेंगू एंटीबॉडी का पता चला है। इस परिणाम के आधार पर भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान केंद्र (आईसीएमआर) ने देश के बाकी शहरों में भी इसी तरह का सीरो सर्वे कराने का फैसला लिया है।
विज्ञापन
जानकारी के अनुसार, पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) की टीम ने भारतीय आबादी में डेंगू प्रसार का सही आकलन करने के लिए सीरो सर्वे किया। इस सर्वे में शामिल लोगों के नमूने लेकर एंटीबॉडी की जांच की गई। साथ ही 2009 के उन परिणामों से तुलना की, जिसमें 62.9 फीसदी लोगों को कभी न कभी डेंगू का संक्रमण हुआ।
आईसीएमआर के अनुसार, कोरोना महामारी के दौरान आबादी में संक्रमण का सही प्रसार पता करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सीरो सर्वे किया गया। यह एक ऐसा सर्वे होता है, जिसमें रैंडम तौर पर लोगों का चयन कर उनके रक्त का नमूना लेकर एंटीबॉडी की जांच की जाती है।
विज्ञापन
दरअसल, मौजूदा समय में डेंगू वायरस के चारों स्ट्रेन आबादी में मौजूद हैं इसलिए आईसीएमआर ने सीरो सर्वे के जरिये वास्तविक तौर पर आबादी में डेंगू के स्ट्रेन के प्रसार का पता लगाया है।
लोगों पर हुआ सर्वे
जर्नल ऑफ इंफेक्शन एंड पब्लिक हेल्थ के आगामी नवंबर माह के अंक में प्रकाशित इस सीरो सर्वे अध्ययन में आईसीएमआर ने जानकारी दी है कि पुणे शहर में 1654 लोगों का चयन कर उनके नमूने की जांच में 88.04 फीसदी आबादी में एंटीबॉडी मिली हैं जो किसी व्यक्ति के डेंगू संक्रमित होने के बाद शरीर में विकसित होती हैं।
डेंगू टीका पर विचार जरूरी
एनआईवी के वरिष्ठ वैज्ञानिक बाबासाहेब वी. टंडाले ने कहा है कि भारतीय आबादी में डेंगू का प्रसार काफी अधिक है। इसकी झलक पुणे के सीरो सर्वे में मिली है। देश के बाकी शहरों और क्षेत्रों में भी इस तरह का सर्वे होना चाहिए ताकि राष्ट्रीय स्तर पर एक वास्तविक आंकड़ा मिल सके।