केंद्र सरकार ने कई फार्मास्युटिकल कंपनियों को दस करोड़ से ज्यादा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन गोलियों का ऑर्डर दिया है जिसकी सिफारिश आईसीएमआर ने कोविड-19 के खिलाफ काम कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों के लिहाज से ऐहतियातन इस्तेमाल के लिए की है। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाली इस दवाई का इस्तेमाल कोरोना वायरस के रोगियों या संदिग्धों की देखभाल में लगे लोगों के लिए करने की सिफारिश की है। घरों में रह रहे उन लोगों के लिए भी दवा की सिफारिश की गई है जिनमें बीमारी के लक्षण नहीं हैं लेकिन जो संक्रमितों के संपर्क में आए हैं।
अधिकारी के मुताबिक कि मलेरिया रोधी दवा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन की 10.70 करोड़ गोलियों का ऑर्डर दिया गया है। 70 लाख से अधिक टैबलेट पहले ही खरीदी जा चुकी हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाल ही में कोरोना वायरस के संक्रमण से ग्रस्त लोगों के लिए हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का इस्तेमाल एजिथ्रोमाइसिन के साथ करने की सिफारिश की थी।
मंगलवार को कोविड-19 के क्लीनिकल प्रबंधन पर जारी संशोधित दिशानिर्देशों में मंत्रालय ने कहा कि 12 साल से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए फिलहाल इस दवा की सिफारिश नहीं की जाती।
हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन की मांग में आई तेजी, दवा दुकानों पर नहीं है स्टॉक
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा को कोरोना से लड़ने में प्रमुख भूमिका निभाने वाली दवा बताने के बाद से भारत सहित दुनिया के कई देशों में इसकी मांग में तेजी देखी गई है। यहां हैरान करने वाली बात यह है कि इस दवा को अभी तक कोरोना से बचाव के लिए उपयोग करने की मान्यता भी नहीं मिली है।
कोरोना वायरस के उपचार में दवा की प्रभावकारिता को लेकर बड़े पैमाने पर कोई परीक्षण नहीं किया गया है। वही दवाई विक्रेताओं का कहना है कि वे दवा की कमी का सामना कर रहे हैं। गौरतलब हो कि इस दवा का प्रयोग वे लोग करते है जिन्हें मलेरिया या गठिया का दर्द हो।
हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन को लेकर ट्रंप के ट्वीट के बाद दुनिया के कुछ देशों ने इसे कोरोना वायरस की आपात स्थितियों में और केवल कुछ लोगों की श्रेणियों पर प्रयोग के लिए मंजूरी दे दी। वही, व्हाइट हाउस के अपने संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ एंथोनी फौसी ने दावा किया कि दवा की प्रभावकारिता वास्तविकता से मेल नहीं खाती है और इसकी प्रभावकारिता को सिद्ध करने के लिए नियंत्रित रूप से परीक्षणों की आवश्यकता है।
नई दिल्ली के कैलाश कॉलोनी के एक दवा विक्रेता ने नाम ना छापने की शर्त पर पीटीआई को बताया कि ट्रंप के ट्वीट के बाद से यह दवा स्टॉक में नहीं है। उसने बताया कि दवाओं की आपूर्ति करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
देश में दवा की वर्तमान उपलब्धता के बारे में पूछे जाने पर, शहर के गोविंदपुरी इलाके के एक दवा विक्रेता ने कहा कि उनके स्टोर में कई दिनों से यह दवा स्टॉक से बाहर है। उन्होंने यह भी चिंता व्यक्त की कि जोड़ो के दर्द और हड्डी से संबंधित अन्य स्थिति वाले रोगियों को यह दवा उनके डॉक्टरों द्वारा लिखी जाती है, लेकिन स्टॉक न होने से वह दवा से वंचित रह जाते हैं। एक ओर दवा विक्रेता ने बताया कि हमारे पास एक सप्ताह से अधिक समय से इसकी आपूर्ति नहीं है और हमने वितरकों को दवा का फिर से आपूर्ति करने के लिए कहा है।
नई दिल्ली के अपोलो अस्पताल में वरिष्ठ सलाहकार रुमेटोलॉजिस्ट डॉ रोहिणी हांडा के अनुसार, गठिया के रोगियों को पिछले 10 दिनों से हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा को ढूंढना मुश्किल हो रहा है।
हांडा ने पीटीआई से कहा कि जब से मीडिया में यह खबर आई है कि इससे कोरोना वायरस संक्रमण से लड़ने में मदद मिल सकती है, लोगों द्वारा इसकी अंधाधुंध खरीदारी की जा रही है। ऐसा लगता है कि यह दवा बाजार से गायब हो गई है। उन्होंने कहा कि लोगों को यह महसूस करने की जरूरत है कि इस देश में हर व्यक्ति को हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की जरूरत नहीं है।