बहरहाल, हाल के हफ्तों में यहां इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड कारों को अधिक लोकप्रिय बनाने की दिशा में कोशिशें की जा रही हैं और कंपनियों के लिए कई योजनाएं तैयार की गई हैं, ताकि वे ऐसे उत्पाद तैयार कर सकें।
पाकिस्तान में इंजीनियरिंग डेवलपमेंट बोर्ड (ईडीबी) ने हाल ही में एक मसौदा नीति तैयार की और उसे अपने हितधारकों को भेजा। इसके मुताबिक पूरी तरह से तैयार हाइब्रिड वाहनों पर 10 फीसदी सीमा शुल्क लगाने के प्रस्ताव किया गया है। इसमें कई अन्य सुझाव दिए गए हैं जिनमें से एक यह कि इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों के लिए आयातित घटकों पर 30 फीसदी सीमा शुल्क लगाया जाएगा। इसमें देश में Hyundai (ह्यूंदै) और Kia (किआ) जैसी नई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के लिए प्रोत्साहन शामिल हैं।
हालांकि, Honda (होंडा) और Suzuki (सुजुकी) जैसी दिग्गज जापानी ऑटोमोबाइल कंपनियों ने ईडीबी द्वारा प्रस्तावित प्रस्तावों में कुछ फेरबदल की मांग की है। डॉन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, Honda Atlas Cars (होंडा एटलस कार्स) और Pak Suzuki Company (पाक सुजुकी कंपनी) ने देश में पहले से मौजूद कंपनियों को उतना ही प्रोत्साहन देने का आह्वान किया है, जितना कि नए आई कंपनियों के लिए प्रस्तावित किया जा रहा है। कंपनियां यह भी चाहती हैं कि सरकार मौजूदा कोरोनावायरस महामारी के कारण एक साल के लिए गाड़ियों को स्थानीय रूप से एसेंबल किए जाने को प्रोत्साहित करे।
यह माना जा रहा है कि इस अवधि के दौरान पाकिस्तान में पहले से मौजूद कंपनियों को मौजूदा आर्थिक संकट से बाहर निकलने के लिए बेहतर तरीके से विचार करने का समय मिल जाएगा, जिसने दुनिया के लगभग हर देश को अपनी चपेट में ले लिया है। इसके अलावा, कथित तौर पर कंपनियां स्पेयर पार्ट्स पर आयात शुल्क 45 फीसदी से घटाकर 25 फीसदी कराना चाहती हैं, इसके साथ ही बिक्री कर में भी कटौती की मांग की है, जिससे हाइब्रिड वाहनों के लिए लागत में कमी लाने में मदद मिल सकती है।
उद्योग संगठन पाकिस्तान एसोसिएशन ऑफ ऑटोमोटिव पार्ट्स एंड एक्सेसरीज मैन्युफैक्चरर्स (PAAPAM) ने भी हाइब्रिड या इलेक्ट्रिक वाहन बनाने के इच्छुक कार निर्माताओं को अधिक प्रोत्साहन देने का समर्थन किया है। गौरतलब है कि संगठन ने कहा है कि ऐसे वाहनों का निर्माण करने वाले संयंत्रों को कुछ करों से छूट दी जानी चाहिए।
हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों को लोकप्रिय बनाने के लिए यह बहुत अहम है कि ऐसे उत्पाद बाजार में मौजूद हों। और ऐसे उत्पादों के अस्तित्व के लिए, इनका निर्माण करने के लिए जिम्मेदार कंपनियों को एक निश्चित सीमा तक प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए ताकि न सिर्फ इनकी लागत कम हो बल्कि कंपनियों को मुनाफा भी दिखने लगे।