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बढ़ी एम्फोटेरिसिन बी की मांग: म्यूकोरमाइकोसिस का बढ़ा खतरा, इसलिए दवा की न हो जाए किल्लत

Wed, 12 May 2021 05:16 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

देश में अचानक एम्फोटेरिसिन बी की मांग बढ़ गई है। कुछ राज्यों में डॉक्टर मरीजों को यह दवा तेजी से लिख रहे है। ऐसे में सरकार ने इसका उत्पादन बढ़ाने के उपाय शुरू कर दिए हैं। 
 
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ऐसे होते हैं म्यूकोरमाइकोसिस के लक्षण - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कोरोना से उबरने के बाद कुछ लोगों में ब्लैक फंगस यानी म्यूकोरमाइकोसिस का संक्रमण देखा जा रहा है। इसे खतरे को देखते हुए डॉक्टरों ने मरीजों की दवाओं में एम्फोटेरिसिन बी भी लिखना शुरू कर दी है। इससे इस दवा की मांग तेजी से बढ़ रही है। 

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बुधवार को केंद्रीय रसायन व उर्वरक मंत्रालय ने कहा कि इस दवा की बढ़ती मांग को देखते हुए दवा कंपनियों को एम्फोटेरिसिन बी का उत्पादन बढ़ाने को कहा गया है। उत्पादकों व आयातकों के स्टॉक की समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया गया। 

मंत्रालय ने कहा कि एम्फोटेरिसिन बी की विभिन्न राज्यों में मांग व आपूर्ति की स्थिति को देखते हुए डिपार्टमेंट आफ फार्मा ने 11 मई को इस ड्रग की उपलब्धता की समीक्षा की थी। 10 मई से 31 मई तक संभावित सप्लाई का भी आकलन किया गया है। 
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राज्यों से कहा गया है कि वे इस दवा का निजी व सरकारी अस्पतालोंमें समान रूप से वितरण करें, ताकि इसकी किल्लत न हो। इसके साथ ही यह दवा कहां से मिल सकती है, उसके पते आदि का भी प्रचार करें। 

बता दें, देश में जारी कोविड-19 की दूसरी लहर के बीच कई लोग म्यूकोरमाइकोसिस नाम के फंगल इंफेक्शन की चपेट में आ रहे हैं। यह दुर्लभ फंगल इंफेक्शन है, जो किसी व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर होता है। कोविड-19 और डायबिटीज के मरीजों के लिए यह इंफेक्शन और ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है। इसे ब्लैक फंगस के नाम से भी जाना जाता है। 

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) द्वारा जारी एडवाइजरी के अनुसार म्यूकोरमाइकोसिस फंगल इंफेक्शन है, जो शरीर में बहुत तेजी से फैलता है। म्यूकोरमाइकोसिस इंफेक्शन नाक, आंख, दिमाग, फेफड़े या फिर स्किन पर भी हो सकता है। इस बीमारी में कई लोगों की आंखों की रोशनी तक चली जाती है, वहीं कुछ मरीजों के जबड़े और नाक की हड्डी गल जाती है।

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