जैसे ही यह खबर सामने आई कि दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के लगभग एक दर्जन विधायक पार्टी के संपर्क में नहीं हैं, वैसे ही सियासी गलियारे में आते ही सनसनी फैल गई। इससे आम आदमी पार्टी का यह दावा मजबूत होता दिखाई पड़ा कि उसकी दिल्ली की सरकार को गिराने की कोशिश की जा रही है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सिविल लाइंस स्थित आवास पर विधायक दल की बैठक के दौरान भी कुछ विधायकों के समय से न पहुंचने से बेचैनी बढ़ती जा रही थी और महाराष्ट्र में सरकार गिरने जैसी किसी अनजान आशंका को बल मिल रहा था।
क्या गुजरात-हिमाचल में केजरीवाल को होगा लाभ?
राजनीतिक विशेषज्ञ सुनील पांडेय ने कहा कि भाजपा के तमाम दावों के बीच भी आम आदमी पार्टी अपने आरोपों पर अडिग है। सौरभ भारद्वाज ने वृहस्पतिवार को भी अपने दावे को दुहराया है कि उनके विधायकों को 20-25 करोड़ रूपये का लालच देकर पार्टी को तोड़ने और सरकार गिराने की कोशिश की जा रही है। लेकिन आम आदमी पार्टी के विधायकों की पार्टी के प्रति वफादारी के कारण भाजपा की यह कोशिश कामयाब नहीं हो पाई।
हालांकि, आम आदमी पार्टी ने अब तक कोई ऐसा सबूत जनता के सामने पेश नहीं किया है जिससे यह साबित किया जा सके कि भाजपा का कोई नेता उनके नेताओं के संपर्क में था और पार्टी को तोड़ने की कोशिश कर रहा था। यही कारण है कि आम आदमी पार्टी के दावे पर संदेह पैदा हो रहा है। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी के पास कोई सबूत है तो उसे जनता के सामने पेश करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि फिलहाल आम आदमी पार्टी ने इस बहस को छेड़कर लोगों का ध्यान दूसरे मुद्दे की ओर खींचने में सफल रही है। अब मीडिया में चर्चा का बिंदु बदल गया है जिसे आम आदमी पार्टी की सफलता माना जा सकता है। हालांकि, गुजरात और हिमाचल में उसे इसका कोई बड़ा लाभ मिल पाएगा, यह कहना कठिन है।