राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसी ने दिल्ली के बाहर से आने वाले लाभार्थियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए दिल्ली के प्राइवेट अस्पतालों को योजना में शामिल करने का काम शुरू कर दिया है। फिलहाल आयुष्मान भारत योजना में दिसंबर तक दिल्ली के 25-30 अस्पताल ही शामिल होंगे। हालांकि दिल्ली अभी आयुष्मान भारत योजना का हिस्सा नहीं है और केंद्र और राज्य सरकार के बीच योजना के नाम को लेकर खींचतान चल रही है।
मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जनआरोग्य योजना को लागू करने वाली राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसी के डिप्टी सीईओ डॉ. दिनेश अरोड़ा ने अमरउजाला को बताया दिल्ली के एक अस्पताल ने योजना में शामिल होने के लिए हामी भर दी है। उनके मुताबिक नेशनल बोर्ड आफ एक्रिडेशन हास्पिटल यानी एनएबीएच से मान्यता प्राप्त नांगलोई के सिग्नस सोनिया अस्पताल योजना में शामिल होने वाला दिल्ली का पहला प्राइवेट अस्पताल है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसी के सूत्रों ने बताया कि जल्द ही बत्रा, गंगाराम, फोर्टिस, एस्कॉर्ट और मैक्स जैसे बड़े मल्टीस्पेशिलिटी अस्पताल भी आयुष्मान भारत योजना का हिस्सा बनने वाले हैं। इन अस्पतालों को इम्पैनल करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसी ने एक विशेष पोर्टल भी बनवाया है।
डॉ. अरोड़ा ने बताया कि दिल्ली सरकार इस योजना का नाम बदलना चाहती है, लेकिन केंद्र इसके लिए राजी नहीं है। दिल्ली सरकार इस योजना में ‘प्रधानमंत्री’ की जगह ‘मुख्यमंत्री आम आदमी स्वास्थ्य बीमा योजना’ शामिल करना चाहती है। साथ ही, दिल्ली सरकार का तर्क है कि वह दिल्ली के लोगों के लिए अपनी अलग योजना लाना चाहती है, जिससे यहां के 50 लाख परिवारों को फायदा होगा, वहीं आयुष्मान भारत योजना को लागू करने पर केवल 6 लाख परिवारों को ही फायदा पहुंचेगा।
डॉ. अरोड़ा के मुताबिक योजना में शामिल होने वाले सभी प्राइवेट अस्पतालों को पोर्टेबिलिटी की सुविधा होगी और इन्हें राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसी सीधे इम्पैनल करेगी। उनका कहना है कि दिल्ली में पूरे देश से मरीज इलाज कराने के लिए आते हैं और एम्स, सफदरजंग में लंबी वेटिंग होती है। दिल्ली के योजना में शामिल न होने से आयुष्मान भारत योजना हतोस्ताहित हो रही थी। पहले दिल्ली के प्राइवेट अस्पतालों को हरियाणा राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के जरिए इम्पैनल करने की योजना थी, लेकिन अब सीधे ही शामिल करने का फैसला लिया गया। आमतौर पर देश के बेहतरीन संस्थानों जैसे एम्स और पीजीआई को ही सीधे शामिल किया जाता है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसी के सूत्रों का कहना है कि दिल्ली सरकार नाम बदलने को लेकर दो पत्र लिख चुकी है, लेकिन योजना में से आयुष्मान भारत हटाना संभव नहीं है। वह बताते हैं कि तेलंगाना में इस योजना का नाम आयुष्मान भारत आरोग्यश्री, पश्चिमी बंगाल में आयुष्मान भारत स्वास्थ्य साथी और आंध्र प्रदेश में आयुष्मान भारत एनटीआर वैद्य है।
19 नवंबर तक मिले आंकड़ों के मुताबिक अब तक 240,350 लाभार्थी इस योजना का लाभ उठा चुके हैं। अभी तक 320 करोड़ के क्लेम पास किए जा चुके हैं। वहीं 326 जिलों के 14,995 अस्पताल शामिल हो चुके हैं, जिनमें 7,789 अस्पताल प्राइवेट हैं। इसके अलावा योजना से संबंधित एनएचए कॉल सेंटर पर 8 लाख 61 हजार से ज्यादा कॉल्स रिसीव की जा चुकी हैं। साथ ही 6 लाख 47 हजार लाभार्थियों को ई-कार्ड्स बांटे जा चुके हैं।