फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

देश में क्यों अल्पसंख्यक हो रहे हैं हिंदू! धर्मांतरण पर दिल्ली हाई कोर्ट करेगा शुक्रवार को सुनवाई

Thu, 12 Mar 2020 06:36 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • हाईकोर्ट से अपील- धर्मांतरण के खिलाफ कानून बनाने के लिए केंद्र और दिल्ली सरकार को मिलें निर्देश
  • याचिका में सुप्रीम कोर्ट और लॉ कमीशन के पूर्व की टिप्पणियों का दिया हवाला, शुक्रवार को होगी सुनवाई
विज्ञापन
delhi high court - फोटो : PTI (फाइल फोटो)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दिल्ली हाईकोर्ट में गुरुवार को एक याचिका दायर कर देश में गलत तरीके से हो रहे धर्मांतरण के खिलाफ एक कानून बनाने के लिए केंद्र और दिल्ली सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि संविधान में अपने धर्म का प्रचार-प्रसार करने की छूट दी गई है, लेकिन इसकी आड़ में कुछ लोग हिंदू धर्म की कुछ जातियों और गरीब लोगों को विभिन्न प्रकार का लालच देकर उनका धर्मांतरण करा रहे हैं।

विज्ञापन

याचिका में कहा गया है कि अगर समय रहते इस तरह की गतिविधियों पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो हिंदुस्तान में ही हिंदू अल्पसंख्यक हो जाएंगे। याचिका में इसके पूर्व सुप्रीम कोर्ट, अन्य न्यायालयों और लॉ कमीशन की एक रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया है, जिसमें इस तरह के विषय पूर्व में ही उठाए जा चुके हैं।

याचिका पर शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति डीएन पटेल और न्यायमूर्ति हरिशंकर की पीठ के सामने सुनवाई होगी। याचिकाकर्ता वकील अश्विनी उपाध्याय ने अमर उजाला से कहा कि देश के अनेक राज्यों में हिंदू पहले ही अल्पसंख्यक हो चुके हैं।
विज्ञापन


वर्ष 2001 और 2011 की जनगणना इस बात को प्रमाणित करती है कि देश के कुछ इलाकों में दूसरे धर्मों को मानने वाले लोगों की आबादी आश्चर्यजनक तरीके से बढ़ रही है, जबकि इन्हीं राज्यों में हिंदुओं की आबादी में लगातार गिरावट आ रही है।

याचिका में कहा गया है कि अनुसूचित जाति/जनजाति के लोगों और गरीब लोगों को लालच देकर, करिश्माई करतब दिखाकर धर्म विशेष के प्रतीकों को श्रेष्ठ बताकर और कहीं-कहीं पर काला जादू दिखाकर लोगों का धर्मांतरण किया जा रहा है। इसके लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम का उपयोग भी किया जा रहा है।

इन फैसलों का दिया हवाला

जानकारी के मुताबिक 17 जनवरी 1977 में सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायमूर्तियों की एक पीठ ने स्टैनिस्लॉस केस (Stainislaus Case) में टिप्पणी करते हुए कहा था कि अनुच्छेद 25 में धर्म का प्रचार-प्रसार करने का अधिकार पब्लिक ऑर्डर के अधीन है और यह धर्मांतरण का अधिकार नहीं देता है।

इसी प्रकार 10 मई 1995 में सर्वोच्च अदालत ने सरला मुद्गल केस में कहा था कि केंद्र धर्मांतरण को रोकने से संबंधित विषय पर कानून बनाने की संभावनाओं पर विचार करने के लिए एक कमेटी का गठन कर सकता है।

08 मई 2003 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी इसी तरह के एक विषय पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि किसी जगह हो रही बड़ी जनसभा का उद्देश्य अगर बड़ी संख्या में धर्मांतरण हो, तो यह पब्लिक ऑर्डर का विषय हो जाता है। 27 दिसंबर 2010 को लॉ कमीशन ने धर्मांतरणविरोधी कानून बनाने से संबंधित विषय पर गंभीर टिप्पणी की थी।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें