हाईकोर्ट ने कठुआ गैंगरेप पीड़िता की पहचान उजागर करने पर मीडिया संस्थानों को कड़ी फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने पीड़िता की फोटो व नाम प्रकाशित अथवा प्रसारित करने पर भी रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने दूसरी ओर महिला व बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने का दावा करने वाली संस्थाओं को भी आड़े हाथों लिया है। हाईकोर्ट ने समाचार पत्रों व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पीड़िता से संबंधित खबरों का संज्ञान लेते हुए सुनवाई शुरू की है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायमूर्ति गीता मित्तल की खंडपीठ ने जम्मू-कश्मीर के कठुआ गैंग रेप पीड़िता की फोटो, उसका नाम, परिवार की पहचान व स्कूल का नाम प्रकाशित व प्रसारित करने पर टीवी चैनलों, कई समाचार पत्रों व वेबसाइटों समेत 12 संस्थाओं को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने पूछा कि
पोक्सो व अन्य कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन करने पर क्यों न उन पर कार्रवाई की जाए।
खंडपीठ ने कहा कि मीडिया संस्थानों को पता होना चाहिए कि दुष्कर्म पीड़िता, नाबालिग या पागल शख्स की फोटो अथवा नाम जाहिर नहीं किया जा सकता। इन कानूनी प्रावधानों का सख्ती से पालन भी होना चाहिए। खंडपीठ ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर), महिला आयोग व दिल्ली महिला आयोग को भी पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी किया है।
कोर्ट ने कहा कि इन संस्थाओं को भी इस मामले में पीड़िता का नाम व फोटो जारी करने की जानकारी थी लेकिन तब भी इन्होंने कोई कदम नहीं उठाया। इस मामले में कोर्ट की मदद के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद निगम व अधिवक्ता राजशेखर राव को न्याय मित्र नियुक्त किया गया है। अगली सुनवाई 18 अप्रैल को होगी।