दिल्ली उच्च न्यायालय ने तलाक के दो मामलों में सुनवाई की है। एक मामले में जहां पत्नी को तो दूसरे मामले में पति को राहत मिली। न्यायालय ने पहले मामले में पारिवारिक अदालत के फैसले को उलट दिया। पारिवारिक अदालत ने शादी के 28 साल बाद पति की मांग को मानते हुए केवल इसलिए तलाक दे दिया था क्योंकि पत्नी खाना बनाकर नहीं देती और उससे सहानूभूति नहीं रखती है।
दूसरे मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि पत्नी द्वारा पति के दोस्तों के सामने उसकी बेइज्जती करना, रात में लड़ाई करके सोने न देना और दहेज के झूठे केस में फंसाने की धमकी देना तलाक का आधार हैं। अदालत ने पारिवारिक अदालत द्वारा वायुसेना के एक अधिकारी को उनकी पत्नी से इन आधारों पर तलाक को जायज ठहराया।
न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने कहा कि वायुसेना के अधिकारी से पत्नी रातभर झगड़ा करती है, जिसके कारण वह ठीक से सो नहीं पाता है। वह सुबह पांच बजे ड्यूटी पर जाता है। इससे न केवल उसका बल्कि अन्य लोगों का जीवन भी खतरे में पड़ सकता है।