हाईकोर्ट की रोक के बावजूद दिल्ली सरकार ने अपने कर्मचारियों को पूर्व निर्धारित न्यूनतम वेतन देने का फैसला किया है। इसकी घोषणा करते हुए उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि सरकार की तरफ से कर्मचारियों के लिए यह दिवाली तोहफा है।
सिसोदिया ने कहा कि उन्होंने इस दौरान कई स्कूलों में दौरा किया। सिक्योरिटी गार्ड सहित अनेक कर्मचारियों ने उन्हें बताया कि अक्टूबर माह में पिछले महीने का वेतन कट कर आया है जिससे उन्हें दिक्कतें हो रही हैं। उन्होंने कहा कि इसके बाद कैबिनेट की एक बैठक कर उन्होंने सरकार या उसके अधीन पीएसयू में काम कर रहे कर्मचारियों का वेतन बढ़ाने का निर्णय लिया।
उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव को इस बात के निर्देश दे दिये गए हैं कि नवंबर माह में जब वेतन आए तो उसमें अब तक का कटा वेतन जोड़कर आए जिससे कर्मचारी अपने घरों में अपने परिवार के साथ खुशी से दिवाली मना सकें।
दिल्ली सरकार ने मार्च 2017 में राजधानी के सभी कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन देने का फैसला किया था। इसके बाद कुछ संगठनों ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया था जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने इसे दिल्ली सरकार के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाया और न्यूनतम वेतन के आदेश को निरस्त कर दिया था जिसके बाद कर्मचारियों को एक बार फिर पुराने वेतन पर काम करना पड़ रहा था। दिल्ली सरकार ने हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील भी कर रखी है।