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Delhi Flood: 2050 में भी इसी तरह डूबेगी दिल्ली, नए मास्टर प्लान में बाढ़ से बचने के पर्याप्त उपाय नहीं!

अमित शर्मा
Updated Tue, 11 Jul 2023 04:22 PM IST

सार

Delhi Flood:
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Delhi Flood - फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar


प्रगति मैदान टनल ने खोली पोल

सिविल कार्यों में हमारी तैयारी कितनी निचले स्तर की है, इसकी पोल प्रगति मैदान में बनी सुरंग ने खोल दी है। प्रगति मैदान में लगभग 1.3 किलोमीटर लंबी सुरंग का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं लोकार्पण किया था। इसके लोकार्पण के समय भी दावा किया गया था कि इसमें सुरक्षा, जल निकासी और आपात सहायता से निपटने के लिए पर्याप्त व्यवस्था की गई है। लेकिन बारिश के पानी ने इन सभी दावों की पोल खोल दी है। प्रगति मैदान टनल में भारी पानी जमा होने के कारण वह झील जैसा बन गया है और उसे अस्थाई तौर पर बंद कर दिया गया है।  

अपने ही पानी में डूबने को मजबूर दिल्ली

शहरी मामलों के विशेषज्ञ जगदीश ममगांई ने अमर उजाला से कहा कि राजधानी में जल निकास की व्यवस्था 1976 की है, जबकि तब से शहर की आबादी न्यूनतम पांच गुना से ज्यादा बढ़ चुकी है। इस दौरान हर गली में भारी संख्या में मकान बने हैं और हर मकान में रहने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ी है। लेकिन जल निकासी की व्यवस्था पर्याप्त नहीं हुई है जिसके कारण वर्षा का जल नहीं निकल पा रहा है। यही बारिश का पानी दिल्ली में बाढ़ का कारण बन रहा है।

नई कच्ची कॉलोनियों में भी जल निकासी-जल प्रबंधन की व्यवस्था नहीं

लुटियन दिल्ली जैसे इलाके में तो जल निकासी प्रबंधन अंग्रेजों के जमाने तक के हैं। लेकिन जो नई कच्ची कॉलोनियां विकसित की जा रही हैं, उनमें भी आबादी के अनुसार जल निकासी की सही व्यवस्था नहीं की जा रही है। यही कारण है कि भजनपुरा, सोनिया विहार, गोकलपुरी और ओखला जैसे इलाके थोड़ी सी बारिश में ही डूबने लगते हैं और लोगों को जान-माल का नुकसान उठाना पड़ता है।

फ्लड अलर्ट बेहतर हों- विशेषज्ञ

दि एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (teri) में बाढ़ नियंत्रण रिसर्च से जुड़े फेलो प्रसून सिंह ने कहा कि बारिश का जल एक संपदा की तरह है, जिसका भरपूर इस्तेमाल किया जाना चाहिए। सही तरीके से उपयोग न किए जाने पर यही संपदा दिल्ली जैसे शहरों के लिए खतरा बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा कि शहरी प्लानिंग में हर घर को अपनी क्षमता के अनुसार जल संचयन के लिए स्पॉट विकसित करने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। इससे वर्षा जल का संग्रहण कर बाढ़ को रोकने में मदद मिल सकती है।

किसी शहर का ढांचा इस तरह विकसित नहीं किया जा सकता, जो 50 साल बाद भी होने वाली वर्षा को संभालने में पूरी तरह सक्षम हो सके। इसके लिए पर्याप्त भूमि और धन की कमी हो सकती है। लेकिन 20-25 साल के लिए भी जो व्यावहारिक सिस्टम बनाया जाना संभव है, उसे बनाया जाना चाहिए।

प्रसून सिंह के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में बाढ़ को कंट्रोल करने के लिए मानसून के उचित पूर्वानुमान पर बाढ़ से प्रभावित होने वाले स्थानों का चयन कर उन पर तत्काल कार्रवाई करना ज्यादा लाभप्रद हो सकता है। इसके लिए सभी एजेंसियों को बेहतर तालमेल के साथ काम करना बहुत आवश्यक है।

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