आम आदमी पार्टी की इस ऐतिहासिक जीत के पीछे कुछ अहम कारण प्रमुख रहे। उसकी जीत में सरकार की 200 यूनिट मुफ्त बिजली और पानी की योजना को सबसे बड़ा जिम्मेदार कारण माना जा रहा है। महिलाओं के लिए डीटीसी बसों में मुफ्त सफर और दिल्ली के प्राइवेट शिक्षा माफियाओं पर नकेल लगाना अरविंद केजरीवाल सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इन्हीं योजनाओं के चलते आम आदमी पार्टी सत्ता में लगातार वापसी करने में कामयाब रही।
दिल्ली विधानसभा चुनाव को भाजपा की केंद्रीय इकाई की चुनावी रणनीतिक हार के रूप में देखा जा रहा है। लेकिन एक सच्चाई यह भी है कि भाजपा की केंद्रीय टीम चुनाव के बिलकुल अंतिम समय में दिल्ली विधानसभा चुनाव में सक्रिय हुई। जबकि आम आदमी पार्टी पिछले आठ महीने से इसी चुनाव की तैयारी कर रही थी। लोकसभा चुनाव की तैयारी के समय की गई मेहनत भी वह इसी दृष्टि से कर रही थी।
जब अमित शाह की टीम हरियाणा-झारखंड के चुनावी मैदान में जोर-आजमाइश कर रही थी, उस समय भी गोपाल राय दिल्ली की टीम को मजबूत कर एक-एक मतदाता से मिलने के लिए लगातार कार्यक्रम कर रहे थे। लोकसभा चुनाव के बाद से ही आम आदमी पार्टी नेतृत्व ने छोटी-छोटी सभाओं के जरिए अपने मतदाताओं को जागरूक करने का काम किया।
जमीनी तौर पर वे लोगों को यह एहसास कराते रहे कि उनकी सरकार दिल्ली के आम आदमी के जिंदगी में बदलाव लाने के लिए काम कर रही है। चुनाव परिणाम बता रहे हैं कि दिल्ली की जनता ने आम आदमी पार्टी की इस रणनीति पर अपना भरोसा जताया है।
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पिछले छ: महीने से केवल अपने कामकाज पर फोकस किया। पिछली गलतियों से सबक लेते हुए उन्होंने किसी भी नाकामी के लिए केंद्र को जिम्मदार ठहराने की बजाय अपने कामकाज को जनता के बीच ले गए।
जबकि भाजपा केवल राष्ट्रीय मुद्दों पर खेलती रही। उसे इस बात का एहसास ही नहीं हुआ कि बिजली-पानी और स्वास्थ्य की योजना किस तरह आम आदमी के बीच लोकप्रिय हो रही है। आरोप लगाने की रानीति की बजाय काम करने की यह रणनीति कामयाब हो गई और उन्होंने इतिहास रच दिया।
आम आदमी पार्टी की लोकलुभावन मुफ्त की योजनाओं की तुलना में भाजपा ऐसा कोई ठोस काम जनता के बीच नहीं रख सकी जिस पर जनता उसका भरोसा करती। ऐसा नहीं है कि भाजपा ने दिल्ली के लिए कामकाज नहीं किया, लेकिन वह उन योजनाओं का अपेक्षित प्रचार कर जनता का विश्वास जीतने में असफल रही।
दिल्ली के लिए ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरिफेरल बनाना, दिल्ली से मुंबई के लिए स्पेशल हाई-वे बनाना, द्वारका इलाके में विशाल पार्क बनाना, पश्चिमी यूपी में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बनाना और प्रगति मैदान में विकास के लिए भारी निवेश को वह लोगों तक पहुंचाकर उनका विश्वास जीतने में कामयाब नहीं हो सकी।
सच्चाई यह है कि इन एक-एक योजनाओं की कीमत सैकड़ों-हजारों करोड़ों रुपयों में है और इन कार्यों के पूरा होने से दिल्ली का आर्थिक विकास करने में भारी मदद मिलेगी, लेकिन इन योजनाओं से आम आदमी सीधी तरह से नहीं जुड़ता है। उसके लिए उसकी दाल-रोटी ज्यादा अहमियत रखती है।
यही वजह है कि 200 यूनिट बिजली की बचत उसे सीधे तौर पर अपनी बचत लगी जबकि इन बड़ी योजनाओं से उसका आर्थिक विकास होगा, भाजपा आम लोगों को यह भरोसा नहीं दिला सकी। यही कारण है कि इस चुनाव में आम आदमी पार्टी की सरकार को भारी सफलता मिली जबकि भाजपा की बड़ी-बड़ी योजनाएं धरी की धरी रह गईं।