दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने लोगों के लिए अनेक मुफ्त सेवाएं देने का एलान किया है। इनमें महिलाओं के लिए बसों में मुफ्त सफर, 200 यूनिट तक फ्री बिजली और 20 हजार लीटर पानी के साथ अब मुफ्त वाई-फाई सेवा भी शामिल हो गई है। लेकिन दिल्ली सरकार की इन योजनाओं ने विपक्षी दलों की उलझन बढ़ा दी है। विपक्ष को इन योजनाओं की काट खोजने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।
आगामी विधानसभा चुनावों से पूर्व पार्टी में बैठकों का दौर जारी है। गुरुवार को भाजपा पार्टी मुख्यालय में एक बैठक के दौरान शामिल नेताओं ने पार्टी ने अपनी योजनाओं को ज्यादा बेहतर ढंग से जनता के सामने रखने की रणनीति बनाने पर जोर दिया। बैठक में शामिल एक नेता के मुताबिक केजरीवाल सरकार की योजनाओं में भारी खामियां हैं, जिन्हें जनता के सामने रखा जाएगा। लेकिन उनकी प्राथमिकता दिल्ली सरकार की खामियों को गिनाने से ज्यादा केंद्र सरकार के कामों को बताने की होगी।
भाजपा के दिल्ली प्रदेश के महामंत्री राजेश भाटिया ने कहा कि अरविंद केजरीवाल अपने सारे वायदे निभाने की बात कह रहे हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि आम आदमी पार्टी की नींव जिन मूल मुद्दों को लेकर रखी गई थी, वे उनमें से एक को भी पूरा करने में असफल रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के पांच साल बीत जाने के बाद भी जनलोकपाल का मुद्दा जमीन से गायब है। सरकार ने हर फैसला लेने के लिए ग्राम-मोहल्ला सभा बनाने का वायदा किया था लेकिन इन पर आज तक कोई चर्चा नहीं हुई है।
राजेश भाटिया के मुताबिक पार्टी ने पूरी दिल्ली में सात विशेष पदाधिकारी नियुक्त किये हैं। इनमें हर एक के हिस्से दस विधानसभाओं का काम सौंपा गया है। ये पदाधिकारी हर दिन विधानसभा के मुद्दों पर बैठक कर रणनीति को आगे बढ़ाने का काम करेंगे। इनमें विधानसभा के मूल मुद्दों पर छोटी-छोटी बैठकें और नुक्कड़ सभा आयोजित कर लोगों से उनकी राय लेना है। पार्टी के घोषणा पत्र में इन मुद्दों को प्रमुखता से रखा जाएगा।
भाजपा समर्थित शोध संस्थान पीपीआरसी के निदेशक सुमित भसीन ने कहा कि सरकार के वायदे पूरे करने के दावे पूरी तरह खोखले हैं। आप ने दिल्ली में दो लाख शौचालय बनवाने की बात कही थी। लेकिन उसने एक भी शौचालय नहीं बनवाए हैं। इसी तरह 500 नए कालेज-सरकारी स्कूल खोलने के वायदे में एक भी पूरा नहीं हुआ है। भाजपा नेता सुमित भसीन ने कहा कि आरटीआई में सामने आया है कि दिल्ली सरकार के स्कूलों में विज्ञान के शिक्षक नहीं हैं। ऐसे में कोई सरकार अपने वायदे पूरे करने का दावा करे, तो यह अपने ही घोषणा पत्र को झूठा बताना है।