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एनआरसी से नाम हटने का मतलब मतदाता सूची से नाम कटना नहीं: चुनाव आयोग

Wed, 01 Aug 2018 09:38 PM IST
भाषा, नई दिल्ली
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चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) से नाम हटने का मतलब यह नहीं है कि मतदाता सूची से भी ये नाम हट जायेंगे।

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असम में हाल ही में जारी एनआरसी से लगभग 40 लाख लोगों के नाम हटने के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ओ पी रावत ने आज स्पष्ट किया कि एनआरसी से नाम हटने पर मतदाता सूची से स्वत: नाम कटने का अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिये। 

दरअसल एनआरसी में जिनके नाम नहीं होंगे उन्हें अवैध नागरिक माना जाएगा। इसमें उन भारतीय नागरिकों के नामों को शामिल किया जा रहा है जो 25 मार्च 1971 से पहले असम में रह रहे हैं। उसके बाद राज्य में पहुंचने वालों को बांग्लादेश वापस भेज दिया जाएगा।
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एनआरसी उन्हीं राज्यों में लागू होती है जहां अन्य देश के नागरिक भारत में आ जाते हैं। एनआरसी की रिपोर्ट ही बताती है कि कौन भारतीय नागरिक है और कौन नहीं। बता दें कि 1947 में जब भारत पाकिस्तान का बंटवारा हुआ तो कुछ लोग असम से पूर्वी पाकिस्तान चले गए, लेकिन उनकी जमीन असम में थी और लोगों का दोनों और से आना-जाना बंटवारे के बाद भी जारी रहा।
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तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान और अब बांग्लादेश से असम में लोगों का अवैध तरीके से आने का सिलसिला जारी रहा। इससे वहां पहले से रह रहे लोगों को परेशानियां होने लगीं। साथ ही राज्य की स्थिति दिन पर दिन बदल रही थी। जिसके बाद असम में विदेशियों का मुद्दा तूल पकड़ने लगा। तभी साल 1979 से 1985 के बीच 6 सालों तक असम में एक आंदोलन चला। तब यह सवाल उठा कि यह कैसे तय किया जाए कि कौन भारतीय नागरिक है और कौन विदेशी।

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