केंद्र सरकार के कर्मचारी, राज्य सरकारों के कर्मचारी और पेंशनभोगी, एक जनवरी 2026 से 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों के लागू होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। केंद्रीय कर्मचारियों के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय परिषद संयुक्त परामर्शदात्री समिति (जेसीएम) की स्थायी समिति के सदस्य सी. श्रीकुमार ने बताया कि 16 जनवरी 2025 को, दिल्ली विधानसभा चुनाव से ठीक पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 8वें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दी थी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मीडिया को बताया था कि आयोग के अध्यक्ष और दो सदस्यों की नियुक्ति जल्द ही की जाएगी। आठ महीने बीत चुके हैं, मगर सरकार ने अभी तक 8वें वेतन आयोग के गठन, उसके कार्यक्षेत्र या उसकी रिपोर्ट जमा करने की समय-सीमा पर कोई औपचारिक अधिसूचना जारी नहीं की है। इस देरी से कर्मचारियों और पेंशनभोगियों में गहरी नाराजगी है। 8वें वेतन आयोग के गठन में देरी, यह संकट को और बढ़ा रही है। केंद्र सरकार में 40 लाख स्वीकृत पदों पर 29 लाख कर्मचारी काम कर रहे हैं। ऐसे में केंद्रीय कर्मचारियों पर दबाव का अंदाजा लगाया जा सकता है।
श्रीकुमार के मुताबिक, कर्मचारियों के बीच कई तरह के अनुत्तरित प्रश्न हैं। जैसे, 8वें वेतन आयोग की अधिसूचना कब जारी होगी। इसके कार्यक्षेत्र क्या होंगे। वेतन संशोधन के लिए क्या आवधिकता रहेगी। न्यूनतम वेतन और फिटमेंट फैक्टर पर क्या सिफारिशें होंगी। क्या पेंशनभोगियों को 01.01.2026 से 8वें वेतन आयोग का लाभ मिलेगा, आदि ये हितधारकों की चिंताएं हैं।
राष्ट्रीय परिषद संयुक्त परामर्शदात्री समिति (जेसीएम) की स्थायी समिति के सदस्य सी. श्रीकुमार ने आयोग के गठन में हो रही देरी की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने सरकार को याद दिलाया है कि 22 जुलाई 2025 को संसद में भी वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने केवल इतना कहा था कि रक्षा, गृह मंत्रालय, कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) और राज्य सरकारों सहित हितधारकों से 'सूचनाएं मांगी गई हैं'।
केंद्र सरकार के विभाग, कार्यबल के संकट से जूझ रहे हैं। यह चिंता की बात है कि 40.35 लाख स्वीकृत पदों के मुकाबले, केवल लगभग 29 लाख कर्मचारी ही उपलब्ध हैं। कर्मचारियों पर अत्यधिक बोझ है। प्रत्येक कर्मचारी कम से कम दो कर्मचारियों का काम कर रहा है। अनुकंपा के आधार पर भी भर्ती पर अघोषित प्रतिबंध है। तीन प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि और डीए बढ़ोतरी के अलावा, कोई वास्तविक वित्तीय लाभ नहीं मिल रहा है। पदोन्नति और कैडर समीक्षाएं रुकी हुई हैं।
20 लाख से ज़्यादा कर्मचारी गारंटीकृत पुरानी पेंशन योजना से बाहर हैं। राष्ट्रीय परिषद जेसीएम (कर्मचारी पक्ष) ने आठवें वेतन आयोग के लिए पहले ही अपने विस्तृत प्रस्ताव, सरकार को प्रस्तुत कर दिए हैं। इनमें न्यूनतम वेतन, सभ्य जीवनयापन वेतन के रूप में - 15वीं अंतरराष्ट्रीय श्रम परिषद (1957) पर आधारित, डॉ. एक्रोयड सूत्र जिसमें अद्यतन उपभोग इकाइयाँ (3.6) शामिल हैं, सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय और इंटरनेट, पीसी और स्मार्टफोन जैसी आधुनिक सुविधाओं का समावेश। गैर-व्यवहार्य वेतन स्तरों का विलय - जैसे, स्तर-1 का स्तर-2 के साथ, स्तर-3 का स्तर-4 के साथ, आदि।
इनके अलावा एमएसीपी सुधार, परिभाषित पदानुक्रम के साथ सेवा में कम से कम 3 पदोन्नति और अंतरिम राहत के मामले में कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को तत्काल स्वीकृति। वेतन और पेंशन के साथ डीए/डीआर का विलय। कर्मचारी नेता के मुताबिक, सातवें वेतन आयोग की विसंगतियों का समाधान किया जाए। सेवानिवृत्ति लाभों में सुधार, जैसे बढ़ी हुई ग्रेच्युटी, परिवर्तित पेंशन की 12 साल की बहाली, पेंशनभोगियों के बीच समानता हो। हर 5 साल में वृद्धि और 2004 के बाद नियुक्त कर्मचारियों के लिए सीसीएस पेंशन नियमों के अंतर्गत परिभाषित गैर-अंशदायी पेंशन योजना की बहाली।
सरकारी कर्मचारी, प्रशासन और उत्पादन, विशेषकर रेलवे और रक्षा क्षेत्र, की रीढ़ रहे हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान, उन्होंने व्यवस्था को चालू रखा, अक्सर अपनी जान की बाजी लगाकर, फिर भी उनके परिवारों को अनुकंपा नियुक्ति तक नहीं दी गई। बतौर श्रीकुमार, भारत आज पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने का दावा करता है, फिर भी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को उचित वेतन और सुरक्षित पेंशन से वंचित रखा जाता है।
यहां तक कि 1915 के इस्लिंगटन आयोग ने भी सिफारिश की थी कि सरकारी कर्मचारियों को सम्मानपूर्वक जीवन जीने के लिए पर्याप्त वेतन दिया जाना चाहिए, जबकि सातवें वेतन आयोग ने इस बात पर ज़ोर दिया था कि सरकारी सेवा एक "स्थिति" है, न कि केवल एक अनुबंध। भूपेंद्र नाथ हज़ारिका बनाम असम राज्य मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने आगाह किया था कि कर्मचारियों की उम्मीदों पर पानी नहीं फेरा जाना चाहिए और एक आदर्श नियोक्ता के रूप में राज्य को निष्पक्षता और विश्वास के साथ काम करना चाहिए।
सीसीएस पेंशन नियमों में हाल ही में किए गए संशोधनों ने मौजूदा पेंशनभोगियों को आठवें वेतन आयोग के लाभों से वंचित कर दिया है। उन्हें केवल भावी पेंशनभोगियों पर लागू किया है। यह बेहद अनुचित है, खासकर जब सबसे ज़्यादा प्रभावित 70+ वरिष्ठ नागरिक हैं, जिन्होंने पहले ही दशकों की सेवा दे दी है। सीजीएचएस सभी स्वास्थ्य देखभाल ज़रूरतों को पूरा करने में विफल रहने के कारण, उन्हें चिकित्सा देखभाल पर भारी खर्च करने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
आज भी बीएसएनएल पेंशनभोगी 7वें वेतन आयोग के अनुरूप अपनी पेंशन में संशोधन का इंतजार कर रहे हैं। उन्हें बुढ़ापे में कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। सी. श्रीकुमार ने सरकार से तत्काल आग्रह किया कि आठवें वेतन आयोग के गठन को अधिसूचित करें। जेसीएम कर्मचारी पक्ष द्वारा प्रस्तुत संदर्भ शर्तों को स्वीकार करे। यह सुनिश्चित करें कि सिफारिशों को एक वर्ष के भीतर अंतिम रूप दिया जाए। उन्हें 1 जनवरी 2026 से कर्मचारियों और पेंशनभोगियों दोनों के लिए लागू करें। सरकार को अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के प्रति अपनी उदासीनता समाप्त करनी चाहिए। उनकी वैध आकांक्षाओं का सम्मान किया जाए। एक सभ्य और सम्मानजनक जीवन जीने के उनके अधिकार को सुनिश्चित किया जाना चाहिए।