प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजराइल यात्रा के दौरान भले ही कोई रक्षा समझौता न हो लेकिन दोनों के बीच अंदरखाने कुछ बेहद एडवांस मिसाइल सिस्टम और नए हथियारों के सौदे पर बातचीत हो सकती है।
अमेरिका भारत को इंटेलिजेंस, सर्विलांस, टारगेट एक्विजिशन एंड रीकन्सेंस यानी आईएसटीएआर एरियल प्लेटफॉर्म मुुहैया करा रहा है। लेकिन भारत इजराइल से हेरोन टीपी जैसा मानवरहित विमान खरीदना (यूएवी) खरीदना चाहता है ताकि आतंकवादियों और सीमा पर घुसपैठ को रोका जा सके।
आईएसटीएआर का इस्तेमाल अफगानिस्तान में एक दशक से होता आया है। भारत की दिलचस्पी हेरोन टीपी में ज्यादा है। इसे खरीदने के लिए तत्कालीन रक्षा सचिव जी मोहन कुमार ने अप्रैल में इजराइल की यात्रा की थी। हेरोन टीपी रक्षा और विदेश मंत्रालय के अधिकारियों को दिखाया भी गया था। हालांकि हेरोन तैयार नहीं रहता है। ऑर्डर देने पर इसे बनाया जाता है।
पीएम के इस दौरे में सिक्यूरिटी टेक्नोलॉजी पर भी अंदरखाने कोई समझौता हो सकता है। भारत आतंकवादियों के बीच होने वाली बातचीत को बीच में ही रोक कर पता लगाने वाला कम्यूनिकेशन सॉफ्टवेयर खरीदना चाहता है। इजराइल से वह यह सौदा मंजूर कराना चाहता है। हालांकि भारत और इजराइल एक दूसरे के साथ आतंकवादियों और दुश्मन देशों से जुड़ी सूचनाएं साझा करता रहा है।
भारत-इजराइल के नए रक्षा सौदे
अप्रैल से अब तक ढाई अरब डॉलर के तीन मिसाइल सौदे
1.16 अरब डॉलर के एयरबोर्न रडार सिस्टम की खरीद की तैयारी
एंटी लांचर के साथ 50 करोड़ डॉलर के 8356 एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल खरीदने की तैयारी