चीन के लांग मार्च 5 रॉकेट की विफलता चीन के सफल अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक बड़ा झटका है। इसके नाकाम होने से चन्द्रमा के नमूने को वापस लाने और प्रतिद्वंद्वी भारत को अंतरिक्ष रैंकिंग में आगे बढ़ने का मौका मिल सकता है। बता दें कि भारत पहले ही मंगलयान को सफलतापूर्वक मंगल ग्रह पर भेज चुका है और हाल ही में एक साथ 104 उपग्रह भेजकर भी खुद को स्पेस प्रोग्राम का लीडर साबित किया।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस घटना से साबित होता है कि चीन का सफलतम अंतरिक्ष कार्यक्रम भी टेक्नोलॉजी के इस युग में मुश्किलों और खतरों से पूरी तरह खाली नहीं है। यूएस नेवल वॉर कॉलेज से जुड़े चीन के स्पेस प्रोग्राम की विशेषज्ञ जोआन जॉनसन फ्रीज का कहना है कि चीन ने इस तरह की नाकामी को टालने के लिए अपना स्पेस प्रोग्राम बेहद सावधानीपूर्वक चलाया है, लेकिन उसे पता था कि एक न एक दिन ऐसा होना ही है।
मालूम हो कि 2 जुलाई को चीन के दूसरे भारी रॉकेट वाहक ‘लांग मार्च-5 वाई2’ का प्रक्षेपण विफल हो गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ऐसा रॉकेट में अनियमितता का पता चलने के कारण हुआ।
चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी शिंहुआ के अनुसार, दक्षिणी प्रांत के हैनन में वेंचांग स्पेस लांच सेंटर से स्थानीय समयानुसार शाम के 7:23 बजे प्रक्षेपित किए जाने के बाद रॉकेट के विमान में अनियमितता का पता चला। 7.5 टन भार का शिजियान-18 चीन का नवीनतम तकनीकी प्रयोग है। यह चीन द्वारा अंतरिक्ष में अब तक लांच किया जाने वाला सबसे भारी उपग्रह माना गया है।