इस बजट की सबसे खास बात है समुद्री सुरक्षा (मेरिटाइम सिक्योरिटी) और सीमा सड़क निर्माण के बजट में करीब 40-40 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। आने वाले समय में समुद्री सुरक्षा सबसे बड़ी सिरदर्द साबित होगी। खासतौर पर चीन के मद्देनजर भी यह सेक्टर अहम हो जाता है।
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और निजी कंपनियों की भागेदारी बढ़ाने की दिशा में सरकार ने एक बार फिर प्रतिबद्धता दिखाई है। यह गेम चेंजर साबित होने जा रहा है। यह फिलहाल दूरगामी योजना भले लगे लेकिन भारत देखते-देखते दुनिया के नक्शे पर एक ठोस डिफेंस निर्माता और आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरेगा।
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इस बजट की सबसे खास बात है समुद्री सुरक्षा (मेरिटाइम सिक्योरिटी) और सीमा सड़क निर्माण के बजट में करीब 40-40 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। आने वाले समय में समुद्री सुरक्षा सबसे बड़ी सिरदर्द साबित होगी। खासतौर पर चीन के मद्देनजर भी यह सेक्टर अहम हो जाता है।
भारत और चीन की समुद्री ताकत के मौजूदा फर्क को पाटने के लिए सरकार की मंशा साफ दिख रही है। लिहाजा नौसेना और कोस्ट गार्ड का 40 फीसदी बजट बढ़ाना काफी अहम है। हालांकि इस दिशा में काफी लंबा सफर तय करना है।
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सीमा सड़क का ठोस नेटवर्क चीन और पाकिस्तान दोनों के मद्देनजर महत्वपूर्ण हो जाता है। इसके लिए बजट में 40 फीसदी की बढ़ोतरी सराहनीय है। यहां बैठकर अंदाज लगाना मुश्किल है कि सीमा सड़क के साथ उन्हें जोड़ने के लिए छोटे छोटे पुल और टनल का निर्माण सीमा सुरक्षा नेटवर्क में कितना बड़ा योगदान कर रहा है। पिछले कुछ सालों ने सीमावर्ती और रोहतांग जैसे दुर्गम इलाकों में ऐसे निर्माण देश की सुरक्षा में बड़ा कदम है।
रक्षा निर्माण व खरीदारी में देसी कंपनियों के लिए 68 फीसदी की सीमा और डीआरडीओ को निजी क्षेेत्र से जोड़ने का काम सरकार की गंभीरता को दर्शाता है। बजट में पिछले साल के मुकाबले 4.6 फीसदी की बढ़ोतरी थोड़ी निराशाजनक जरूर है। अगर यह सात फीसदी से ऊपर होता तो तीनों सेनाओं के तत्काल खरीदे जाने वाले उपकरणों और हथियारों के क्रियान्यवयन में काफी सुविधा होती।