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कोरोना वायरस से सुरक्षा के मामले में किस देश की क्या है स्थिति, देखें सुरक्षा रैंकिंग

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Tanuja Yadav Updated Wed, 15 Apr 2020 06:27 PM IST
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कोरोना वायरस(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : pixabay

कोरोना को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन, सेंटर ऑफ डिसीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन और जॉन्स होप्किन्स यूनिवर्सिटी रोजाना महत्वपूर्ण आंकड़ें हमारे सामने रख रहे हैं लेकिन किसी निरीक्षण के लिए इस डाटा को प्रभावशाली तरीके से नहीं इस्तेमाल किया गया। कोविड-19 महामारी काफी जटिल है, इसके लिए जटिल विश्लेषण का इस्तेमाल तक अच्छे परिणाम सामने लाए जा सकते हैं।

डीप नॉलेज ग्रुप ने डाटा के विश्लेषण के लिए अग्रिम विश्लेषणात्मक ढांचा तैयार किया है जिससे लोगों और देश की सरकारों को मानव सभ्यता बचाने के लिए कड़े फैसले लेने में मदद मिल सके। डीप नॉलेज ग्रुप की एक टीम ने 200 देशों में फैले कोरोना वायरस के आंकड़ों को इकट्ठा कर उनका दोबारा विश्लेषण किया। जिसमें से 60 देशों के गहन अध्ययन के बाद परिणाम सामने आया। इन परिणामों को आसान भाषा में समझाने के लिए टीम ने एक रैंकिंग सिस्टम बनाया। 



प्रगतिशील विश्लेषण से समझें कोरोना की जटिलताएं
कोरोना वायरस के विश्लेषणात्मक ढांचे को ऐसे डिजाइन किया गया है कि ताकि वायरस से होने वाले आर्थिक और स्वास्थ्य परिवर्तनों को आसानी से समझा जा सके। जो भी परिणाम सामने आए वो तथ्यों से पूर्ण और निष्पक्ष हैं। 

विश्लेषण बताता है कि कुछ देशों ने कोरोना को हराने या काबू करने को लेकर अच्छा प्रदर्शन किया है। इन देशों ने कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या को 50,000 के पार होने से पहले ही क्वारंटीन पर ज्यादा जोर दिया। उदाहरण के तौर पर चीन और जर्मनी ने वायरस को नियंत्रण में रखने के लिए इमरजेंसी की स्थिति बना कर रखी और अस्पतालों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया। इन देशों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोट जैसे तकनीकी का भी इस्तेमाल किया।

इन चार मानकों पर की किसी देश की रैंकिंग

  • क्वारंटीन कार्यक्षमता
  • निगरानी और नजरबंदी
  • सरकारी प्रबंध कार्यक्षमता
  • इमरजेंसी इलाज की तत्परता
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कोरोना वायरस(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : pixabay
कोरोना को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन, सेंटर ऑफ डिसीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन और जॉन्स होप्किन्स यूनिवर्सिटी रोजाना महत्वपूर्ण आंकड़ें हमारे सामने रख रहे हैं लेकिन किसी निरीक्षण के लिए इस डाटा को प्रभावशाली तरीके से नहीं इस्तेमाल किया गया। कोविड-19 महामारी काफी जटिल है, इसके लिए जटिल विश्लेषण का इस्तेमाल तक अच्छे परिणाम सामने लाए जा सकते हैं।

डीप नॉलेज ग्रुप ने डाटा के विश्लेषण के लिए अग्रिम विश्लेषणात्मक ढांचा तैयार किया है जिससे लोगों और देश की सरकारों को मानव सभ्यता बचाने के लिए कड़े फैसले लेने में मदद मिल सके। डीप नॉलेज ग्रुप की एक टीम ने 200 देशों में फैले कोरोना वायरस के आंकड़ों को इकट्ठा कर उनका दोबारा विश्लेषण किया। जिसमें से 60 देशों के गहन अध्ययन के बाद परिणाम सामने आया। इन परिणामों को आसान भाषा में समझाने के लिए टीम ने एक रैंकिंग सिस्टम बनाया। 

प्रगतिशील विश्लेषण से समझें कोरोना की जटिलताएं
कोरोना वायरस के विश्लेषणात्मक ढांचे को ऐसे डिजाइन किया गया है कि ताकि वायरस से होने वाले आर्थिक और स्वास्थ्य परिवर्तनों को आसानी से समझा जा सके। जो भी परिणाम सामने आए वो तथ्यों से पूर्ण और निष्पक्ष हैं। 

विश्लेषण बताता है कि कुछ देशों ने कोरोना को हराने या काबू करने को लेकर अच्छा प्रदर्शन किया है। इन देशों ने कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या को 50,000 के पार होने से पहले ही क्वारंटीन पर ज्यादा जोर दिया। उदाहरण के तौर पर चीन और जर्मनी ने वायरस को नियंत्रण में रखने के लिए इमरजेंसी की स्थिति बना कर रखी और अस्पतालों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया। इन देशों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोट जैसे तकनीकी का भी इस्तेमाल किया।

इन चार मानकों पर की किसी देश की रैंकिंग
  • क्वारंटीन कार्यक्षमता
  • निगरानी और नजरबंदी
  • सरकारी प्रबंध कार्यक्षमता
  • इमरजेंसी इलाज की तत्परता

कोविड-19 सुरक्षा श्रेणी दुनिया के 40 देश

कोरोना सुरक्षा रैंकिंग - फोटो : dkv.global
सुरक्षा श्रेणी ढांचे के तहत महामारी के दौरान किस देश ने स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए क्या कदम उठाए, उसका उल्लेख है। 200 देशों से कोरोना संक्रमित मरीजों का डाटा लिया गया लेकिन श्रेणी में केवल 60 देशों को ही शामिल किया गया। सुरक्षा श्रेणी में किसी देश को इन मानकों के आधार पर रखा गया...
  • कोरोना के संक्रमण से बचाव
  • कोरोना से मरने वालों की संख्या
  • क्वारंटीन और संक्रमण पर निगरानी
  • मरीजों की नजरबंदी
  • बड़े स्तर पर सुरक्षा और स्थिरता
  • संक्रमित मरीजों से सुरक्षा के इंतजाम

जोखिम श्रेणी में दुनिया के 20 देश 

कोरोना के जोखिम रैंकिंग वाले देश - फोटो : dkv.global
जोखिम श्रेणी में उन देशों को रखा गया जहां कोरोना महामारी को लेकर ज्यादा जोखिम दिखा। इस श्रेणी को बनाने के लिए जिन मानकों को आधार बनाया गया उनमें संक्रमण को लेकर जोखिम, अस्पताल की व्यवस्था, मौत का आंकड़ा और स्वास्थ्य सुविधाओं को शामिल किया गया। इसी के साथ नकारात्म अर्थव्यवस्था का जोखिम, लोगों की जीवनशैली की गुणवत्ता को भी शामिल किया गया।

इस ढांचे का इस्तेमाल देशों को कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या, सुरक्षा के बंदोबस्त तेज करना, लोगों की जिंदगी को सुधारने से संबंधित सूचना देने के लिए किया गया। इस ढांचे को बनाने के लिए चार मानकों को आधार बनाया गया..
  • संक्रमण फैलने का जोखिम
  • सरकार का प्रबंध
  • स्वास्थ्य सुविधाएं और कार्यक्षमता
  • क्षेत्रीय विशेष जोखिम

इलाज क्षमता श्रेणी में दुनिया के 10 देश

कोरोना के इलाज क्षमता वाले देश - फोटो : dkv.global
किस देश में कोरोना से लड़ने के लिए इलाज की क्या क्षमता है, ये समझने के लिए इस श्रेणी को बनाया गया। श्रेणी में दुनिया के दस देशों को शामिल किया गया जहां इलाज की दक्षता अन्य देशों से अच्छी रही। इसमें संक्रमण के फैलने की निगरानी कैसे, गंभीर हालात वाले मरीजों की देखभाल कैसी, टेस्टिंग में कितना सुधार और कोरोना से लड़ने के लिए वैक्सीन पर क्या काम किया जा रहा है जैसे कार्यों को शामिल किया गया। इस ढांचे को बनाने के लिए चार मानकों को आधार बनाया गया...
  • बीमारी पर निगरानी
  • बीमारी के लिए प्रबंध
  • इमरजेंसी इलाज
  • शोध और विकास के लिए नए प्रयोग

कोरोना के दौरान सबसे ज्यादा मददगार 15 देश

कोरोना में सबसे ज्यादा मददगार वाले देश - फोटो : dkv.global
इस श्रेणी में उन देशों को शामिल किया गया जहां की सरकारों ने कोरोना पर काबू पाने के लिए उम्दा दर्जे का काम किया। इसमें देश की जनता के प्रति सरकार की कार्यक्षमता और आर्थिक मोर्चे पर सरकार के फैसले को सम्मिलित किया गया। 
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