मुगलसराय जंक्शन अब दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन के नाम से जाना जाएगा। मुगलसराय स्टेशन पर देश के हर कोने ट्रेनें आती-जाती हैं इसलिए ये भारतीय रेल का प्रमुख केन्द्र भी है। मुगलसराय से हर दिन करीब 250 ट्रेनें गुजरतीं हैं। अगर इसकी धड़कन रुकी तो पूरी भारतीय रेल का नवर्स ब्रेकडाउन हो जाता है। एशिया का सबसे बड़ा यार्ड होने की वजह से यहां सबसे अधिक ट्रेनें ठहराई जाती हैं।
बताते हैं कि इसी स्टेशन पर एकदिन भाजपा प्रणेता पण्डित दीनदयाल उपाध्याय का शरीर सफेद कपड़े में लिपटा मिला था। मुगलसराय देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जन्मस्थली भी है। बनारस से 15 किलोमीटर दूर बसे इस मुगलसराय को चंदौली का मिनी महानगर भी है। मुगलसराय की विश्व में अपनी अलग पहचान है। यहां एशिया का सबसे बड़ा रेलवे यार्ड और एशिया की विशालतम कोयला मण्डी है।
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मुगलकाल में यहां मुगलों की दो सराय होती थीं जिसमें मुगलों की सेना और व्यापारी रुकते थे। इस शहर को बसाने में शेरशाह सूरी का बड़ा योगदान है। पहला ग्रान्ट ट्रंक रोड भी यहीं से शुरू हुई थी। मुगलसराय राष्ट्रीय राज मार्ग नम्बर दो पर बसा है। मुगलसराय दिल्ली और हावड़ा रेल लाइन के बीच स्थित है।