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कर्नाटक संकट पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश, स्पीकर लें बागी विधायकों के इस्तीफे पर फैसला

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Updated Wed, 17 Jul 2019 10:16 AM IST
मुंबई में बागी विधायक - फोटो : ANI

खास बातें

  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा- बागी विधायकों के इस्तीफे पर स्पीकर लें फैसला।
  • सुप्रीम कोर्ट ने विधायकों को विधानसभा की कार्यवाही में भाग लेने के लिए बाध्य नहीं करने का निर्देश दिया।
  • इस्तीफे पर फैसला लेने के कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष का अधिकार अदालत के निर्देश या फैसले से प्रभावित नहीं होना चाहिए।
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संवैधानिक संतुलन को बनाए रखने की आवश्यकता है।
  • सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद विश्वासमत पर सस्पेंस गहराया।
सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के 15 बागी विधायकों की याचिका पर बुधवार को अपना फैसला सुना दिया है। फैसले में कोर्ट ने कहा है कि विधानसभा अध्यक्ष विधायकों के इस्तीफों पर फैसला लें। लेकिन अध्यक्ष पर किसी समससीमा में फैसला लेने के लिए दबाव नहीं डाला जाएगा। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विधायकों को भी विधानसभा में मौजूद होने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। 

बता दें इस फैसले से 14 महीने पहले बनी कुमारस्वामी सरकार को तगड़ा झटका लगा है। विधायकों द्वारा दायर इस याचिका में कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष को कांग्रेस-जेडीएस के बागी विधायकों के इस्तीफे स्वीकार करने की मांग की गई थी।

 मुंबई में मौजूद बागी विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कहा कि पीछे हटने का सवाल नहीं है, विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा लेने का भी कोई सवाल नहीं उठता।

क्या कहता है गणित?

कर्नाटक विधानसभा में कुल 224 सीटें हैं। अगर स्पीकर को हटा दिया जाए सीटों की संख्या 223 हो जाती है। ऐसे में बहुमत के लिए 112 सीटें जरूरी हैं। मौजूदा गठबंधन सरकार के पास 116 सीट (कांग्रेस 78 +जेडीएस 37 + बसपा 1) हैं।

अगर कल विश्वास मत में इस्तीफा देने वाले 16 विधायक शामिल नहीं होते हैं तो सदन में 207 सीटों पर ही वोटिंग होगी। जिसमें बहुमत के लिए 104 सीट जरूरी हैं। ऐसे में कुमारस्वामी सरकार के पास केवल 100 ही सीटें बचती हैं। जबकि भाजपा के पास 105 विधायकों और दो निर्दलीय को मिलाकर कुल 107 सीटें हैं।

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मुकुल रोहतगी - फोटो : ANI

किसने क्या कहा?

बागी विधायकों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी का कहना है, कल होने वाले विश्वास मत को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दो जरूरी बातें कही हैं- 15 विधायकों को कल विधानसभा में पेश होने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। सभी 15 विधायकों को कल सदन जाने या ना जाने की छूट दी गई है।

रोहतगी ने आगे कहा, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उनके खिलाफ (बागी विधायक) तीन लाइन का जारी हुआ व्हिप ऑपरेटिव नहीं है। दूसरी बात, अध्यक्ष को इस्तीफे के बारे में फैसला करने का समय दिया गया है कि वह कब और क्या फैसला करना चाहते हैं।

भाजपा नेता जगदीश शेट्टर का कहना है, एचडी कुमारस्वामी के कारण राज्य में अराजकता है। उन्हें इस फैसले के बाद तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए और विश्वास मत के लिए इंतजार करना चाहिए।

वहीं कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा का इस फैसले पर कहना है, निश्चित रूप से सरकार नहीं चलेगी क्योंकि उनके पांस नंबर नहीं हैं। वहीं विधानसभा स्पीकर का इस मामले पर कहना है कि, मैं फैसला सुनाऊंगा जो संविधान, कोर्ट और लोकपाल के विपरीत नहीं होगा।

येदियुरप्पा ने आगे कहा, कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने अपना जनादेश खो दिया है, जब बहुमत नहीं है तो उन्हें कल इस्तीफा देना होगा। मैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करता हूं, ये संविधान और लोकतंत्र की जीत है। ये बागी विधायकों की नैतिक जीत है। ये केवल एक अंतरिम आदेश है। सुप्रीम कोर्ट भविष्य में स्पीकर की शक्तियां तय करेगा।

कल सुरक्षित रखा था फैसला

इस मामले में मंगलवार को कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। हालांकि कुमारस्वामी और विधानसभा अध्यक्ष ने बागी विधायकों की याचिका पर विचार करने के सुप्रीम कोर्ट के अधिकार पर सवाल उठाए हैं। वहीं बागी विधायक विधानसभा अध्यक्ष आर रमेश कुमार पर आरोप लगा रहे हैं कि वह बहुमत खो चुकी सरकार को सहारा देने की कोशिश कर रहे हैं। 

बागी विधायकों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने पीठ से अनुरोध किया कि इस्तीफे और अयोग्यता के मुद्दे पर यथास्थिति बनाए रखने का स्पीकर को निर्देश देने संबंधी अंतरिम आदेश जारी रखा जाएगा। रोहतगी ने कहा कि अगर विधानसभा की कार्यवाही होती है तो इन विधायकों को व्हिप के आधार पर सदन में उपस्थित रहने से छूट दी जानी चाहिए क्योंकि मौजूदा सरकार अल्पमत में हैं। 

मुख्यमंत्री की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने कहा कि बागी विधायक सरकार को गिराना चाहते हैं। ये विधायक चाहते हैं स्पीकर के अधिकारों के मामले में अदालत दखल दे। 
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