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Supreme Court: बीमा पॉलिसी के तहत मुआवजे पर दोबारा करें फैसला, इस मामले में NCDRC को मिला 'सुप्रीम' निर्देश

Mon, 07 Apr 2025 07:22 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एनसीडीआरसी को 2005 में एक कंपनी को हुए नुकसान के लिए बीमा पॉलिसी के तहत मुआवजे की राशि पर नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया। कंपनी ने फैक्ट्री शेड के ढहने से हुए नुकसान के लिए बीमा फर्म से मुआवजा मांगा था। 

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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) को अहम निर्देश दिया। इसके तहक न्यायालय ने एनसीडीआरसी को निर्देश दिया कि वह 2005 में एक कंपनी को हुए नुकसान के लिए बीमा पॉलिसी के तहत देय मुआवजे की राशि पर नए सिरे से विचार करे। यह आदेश जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने अगस्त 2022 में एनसीडीआरसी द्वारा दिए गए फैसले के खिलाफ बीमा कंपनी की अपील पर सुनवाई करते हुए दिया।

बता दें कि एनसीडीआरसी ने पहले माना था कि बीमा कंपनी को कंपनी को मुआवजा देना चाहिए क्योंकि फैक्ट्री शेड के ढहने से कंपनी को नुकसान हुआ था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कंपनी ने कंपनी ने बीमा फर्म से आग और विशेष खतरों के खिलाफ एक व्यापक बीमा पॉलिसी ली थी। इस पॉलिसी की अवधि 30 जून 2005 से 29 जून 2006 तक थी। 

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बीमा कंपनी ने इस तर्क पर मुआवजा देने से किया इनकार
यह मामला एक कंपनी के नुकसान से जुड़ा था, जो 2005 में भारी बारिश के कारण अपने फैक्ट्री शेड के ढहने के कारण प्रभावित हुई थी। कंपनी ने बीमा कंपनी से 91 लाख रुपये का मुआवजा मांगा था। इसके बाद, बीमा कंपनी ने एक सर्वेक्षक नियुक्त किया, जिसने नुकसान का आकलन सिर्फ 8.89 लाख रुपये किया और दावा किया कि यह नुकसान जलप्लावन के कारण नहीं हुआ, इसलिए पॉलिसी के तहत नहीं कवर होता।

एनसीडीआरसी ने मुआवजा देने का दिया निर्देश

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बीमा कंपनी के द्वारा मुआवजे को लेकर दिए गए तर्क पर कंपनी ने इसके बाद एनसीडीआरसी में शिकायत की, जिसमें उसने एक स्वतंत्र सर्वेक्षक द्वारा किए गए आकलन का हवाला दिया, जिसमें नुकसान की राशि 46.97 लाख रुपये बताई गई थी। एनसीडीआरसी ने इस रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए बीमा कंपनी को 46.97 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया।

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फिर विचार करने का निर्देश

इसके बाद बीमा कंपनी ने इस फैसले को चुनौती दी, यह कहते हुए कि एनसीडीआरसी ने मुआवजे की राशि पर सही तरीके से विचार नहीं किया। इसपर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एनसीडीआरसी ने बीमा कंपनी द्वारा प्रस्तुत सर्वेक्षक की रिपोर्ट पर ठीक से विचार नहीं किया और बिना सही आकलन के मुआवजे की राशि बढ़ा दी। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को एनसीडीआरसी के पास भेजते हुए उसे मुआवजे की राशि पर नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया और मामले को प्राथमिकता के आधार पर जल्दी निर्णय लेने को भी कहा।

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