सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एनसीडीआरसी को 2005 में एक कंपनी को हुए नुकसान के लिए बीमा पॉलिसी के तहत मुआवजे की राशि पर नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया। कंपनी ने फैक्ट्री शेड के ढहने से हुए नुकसान के लिए बीमा फर्म से मुआवजा मांगा था।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) को अहम निर्देश दिया। इसके तहक न्यायालय ने एनसीडीआरसी को निर्देश दिया कि वह 2005 में एक कंपनी को हुए नुकसान के लिए बीमा पॉलिसी के तहत देय मुआवजे की राशि पर नए सिरे से विचार करे। यह आदेश जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने अगस्त 2022 में एनसीडीआरसी द्वारा दिए गए फैसले के खिलाफ बीमा कंपनी की अपील पर सुनवाई करते हुए दिया।
बता दें कि एनसीडीआरसी ने पहले माना था कि बीमा कंपनी को कंपनी को मुआवजा देना चाहिए क्योंकि फैक्ट्री शेड के ढहने से कंपनी को नुकसान हुआ था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कंपनी ने कंपनी ने बीमा फर्म से आग और विशेष खतरों के खिलाफ एक व्यापक बीमा पॉलिसी ली थी। इस पॉलिसी की अवधि 30 जून 2005 से 29 जून 2006 तक थी।
एनसीडीआरसी ने मुआवजा देने का दिया निर्देश
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फिर विचार करने का निर्देश
इसके बाद बीमा कंपनी ने इस फैसले को चुनौती दी, यह कहते हुए कि एनसीडीआरसी ने मुआवजे की राशि पर सही तरीके से विचार नहीं किया। इसपर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एनसीडीआरसी ने बीमा कंपनी द्वारा प्रस्तुत सर्वेक्षक की रिपोर्ट पर ठीक से विचार नहीं किया और बिना सही आकलन के मुआवजे की राशि बढ़ा दी। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को एनसीडीआरसी के पास भेजते हुए उसे मुआवजे की राशि पर नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया और मामले को प्राथमिकता के आधार पर जल्दी निर्णय लेने को भी कहा।